सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

39 साल बाद ₹100 की रिश्वत के मामले में HC से मिली राहत

C

CG Khabar

19 सित. 2025, 10:01 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक 39 साल पुराने रिश्वत मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम के पूर्व बिल असिस्टेंट जगेश्वर प्रसाद अवस्थी को बरी कर दिया गया है. यह मामला 1986 का है, जब अवस्थी पर एक कर्मचारी से ₹100 की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था.


निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक साल की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने अब इस फैसले को पलट दिया है. कोर्ट ने कहा कि रिश्वत मांगने का कोई ठोस सबूत नहीं है, और इसलिए अवस्थी को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है.

विज्ञापन


मामला क्या था?


1986 में, जब ₹100 की कीमत आज से कहीं अधिक थी, जगेश्वर प्रसाद अवस्थी पर आरोप लगा कि उन्होंने कर्मचारी अशोक कुमार वर्मा का बकाया बिल पास करने के लिए ₹100 की रिश्वत मांगी थी. वर्मा ने इसकी शिकायत लोकायुक्त से की, जिसके बाद एक ट्रैप ऑपरेशन किया गया. फिनॉल्फ्थेलीन पाउडर लगे नोटों के साथ अवस्थी को पकड़ा गया. 2004 में निचली अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए एक साल की जेल की सजा दी थी.


हाई कोर्ट का फैसला: ट्रैप था नाकाम


हाई कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया. कोर्ट ने चार मुख्य बिंदुओं के आधार पर अवस्थी को बरी किया:


*कोई स्वतंत्र गवाह नहीं: अभियोजन पक्ष कोई ऐसा गवाह पेश नहीं कर सका, जिसने अवस्थी को रिश्वत मांगते सुना हो.


*शैडो गवाह की असफलता: ट्रैप में शामिल शैडो गवाह ने स्वीकार किया कि वह न तो बातचीत सुन सका और न ही उसने अवस्थी को पैसे लेते देखा.


*दूरी का सवाल: सरकारी गवाह 20-25 गज की दूरी पर थे, जिसके कारण यह संदेहास्पद है कि उन्होंने लेन-देन को स्पष्ट रूप से देखा हो.


*नोटों पर असमंजस: यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पकड़ा गया नोट ₹100 का एक था या ₹50 के दो नोट थे.


अवस्थी का पक्ष


अवस्थी ने दलील दी कि जिस समय रिश्वत मांगने का आरोप लगा, उनके पास बिल पास करने का अधिकार ही नहीं था. यह अधिकार उन्हें कथित घटना के एक महीने बाद मिला था. हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल "रंगे हुए नोट" मिलने से रिश्वत का अपराध साबित नहीं होता. इसके लिए रिश्वत मांगने का स्पष्ट इरादा और ठोस सबूत जरूरी हैं.


39 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जगेश्वर प्रसाद अवस्थी अब सभी आरोपों से मुक्त हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP