प्री-डिपॉजिट और अंडरटेकिंग के बाद GST वसूली पर रोक
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एक बार जब करदाता सीजीएसटी एक्ट की धारा 112(8) के तहत वैधानिक प्री-डिपॉजिट जमा कर देता है और अपीलीय ट्रिब्यूनल के कार्यशील होने पर अपील दाखिल करने का अंडरटेकिंग दाखिल करता है, तो बकाया जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) की वसूली नहीं की जा सकती.
कोर्ट ने 11 जुलाई 2024 को जारी सीबीआईसी सर्कुलर नंबर 224/18/2024-जीएसटी का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी शर्तों के पालन पर, बकाया पुष्ट मांग की वसूली धारा 112(9) के तहत स्वतः स्थगित हो जाती है.
याचिकाकर्ता, अर्चिता सोप एंड केमिकल एलएलपी ने संयुक्त आयुक्त (अपील) द्वारा 9 सितंबर 2024 को पारित आदेश और 10 मार्च 2025 को धारा 161 के तहत उनकी सुधार आवेदन की अस्वीकृति को चुनौती दी थी.
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वित्त मंत्रालय के सर्कुलर के अनुसार, करदाता प्री-डिपॉजिट जमा करने और अपीलीय ट्रिब्यूनल के कार्यशील होने पर अपील दाखिल करने का अंडरटेकिंग देने पर बकाया मांग की वसूली से संरक्षण के हकदार हैं.
न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सर्कुलर स्पष्ट रूप से बताता है कि करदाता अपने जीएसटी पोर्टल के माध्यम से प्री-डिपॉजिट राशि जमा कर सकते हैं और संबंधित अधिकारी को अंडरटेकिंग दे सकते हैं कि वे ट्रिब्यूनल के कार्यशील होने पर अपील दाखिल करेंगे. इसके बाद, बकाया पुष्ट मांग की वसूली स्वतः स्थगित हो जाती है.
कोर्ट ने कहा, "पक्षों के विद्वान वकीलों द्वारा की गई दलीलों और विशेष रूप से इस बात को ध्यान में रखते हुए कि प्रथम अपील के निपटारे तक और अपीलीय ट्रिब्यूनल के कार्यशील होने तक बकाया राशि की वसूली के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश हैं, इस कोर्ट का मानना है कि इस रिट याचिका में निर्णय के लिए कुछ भी शेष नहीं है."
तदनुसार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सर्कुलर नंबर 224/18/2024-जीएसटी का पालन करने के लिए 15 दिनों के भीतर आवश्यक अंडरटेकिंग दाखिल करने और प्री-डिपॉजिट जमा करने की स्वतंत्रता प्रदान की.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर राशि जमा नहीं की जाती, तो आदेश अपनी प्रभावशीलता खो देगा और वसूली कार्यवाही फिर से शुरू हो सकती है.