HC ने चिकित्सा सेवाओं की बेहतर सुविधाओं के लिए शपथपत्र मांगा
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने विशेष रूप से डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में मरीजों की भीड़, रिएजेंट्स की अनुपलब्धता, रात के समय चिकित्सा कर्मचारियों की कमी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसे मुद्दों को रेखांकित किया.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव द्वारा दायर शपथपत्रों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि हालांकि राज्य सरकार ने कुछ प्रयास किए हैं, लेकिन ये मरीजों की बढ़ती संख्या और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हैं.
कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा, “शपथपत्रों में दावा किया गया है कि पर्याप्त डॉक्टर मौजूद हैं, लेकिन कई पद खाली हैं. अस्पतालों में मरीजों की भीड़ एक बड़ी समस्या है. अभिकर्मकों की आपूर्ति न होने के कारण आवश्यक जांच नहीं हो पा रही हैं. रात के समय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं हो रहा है, हालांकि कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई हैं. राज्य ने बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन मरीजों की संख्या को देखते हुए ये प्रयास बहुत कम पड़ रहे हैं.”
इससे पहले, कोर्ट ने राज्य के सरकारी अस्पतालों, विशेष रूप से राजधानी रायपुर के अस्पतालों में खराब और अपर्याप्त सुविधाओं पर गंभीर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिया था.
सचिव ने अपने शपथपत्र में बताया कि बिल्हा ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में 50 बिस्तरों की सुविधा और एक मातृ-शिशु अस्पताल है. इस केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 9 स्वीकृत पदों में से केवल 3 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 6 पद खाली हैं. इसी तरह, पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल ऑफिसर क्लास-II के 3 स्वीकृत पद भी खाली हैं. केवल 1 मेडिकल ऑफिसर और 1 डेंटिस्ट, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत हैं, उपलब्ध हैं. इसके अलावा, 6 मेडिकल ऑफिसरों के स्वीकृत पदों के मुकाबले कुल 20 चिकित्सा कर्मचारी हैं.
शपथपत्र में यह भी बताया गया कि पहले निष्क्रिय बताए गए एक्स-रे मशीन और हमर लैब अब पूरी तरह कार्यात्मक हैं. जुलाई में एक्स-रे मशीन से 426 एक्स-रे किए गए, और हमर लैब में 50 में से 32 पैरामीटर नियमित रूप से जांचे जा रहे हैं. हालांकि, अभिकर्मकों की आपूर्ति रुकने के कारण स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है ताकि सभी आवश्यक पैथोलॉजी जांच नियमित रूप से हो सकें. साथ ही, एनेस्थेटिस्ट का पद खाली होने के कारण आपातकालीन और रात के समय ऑपरेशन संभव नहीं हैं.
डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल और डीकेस अस्पताल के संबंध में, शपथपत्र में कहा गया कि इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या बहुत अधिक है. हालांकि, इन अस्पतालों में कुशल पंजीकरण काउंटर मौजूद हैं, और किसी भी मरीज ने पंजीकरण या उपचार में देरी की शिकायत नहीं की है.
कोर्ट ने कहा कि हालांकि राज्य सरकार ने चिकित्सा सेवाओं के स्तर को सुधारने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन ये प्रयास मरीजों की संख्या और उनकी जरूरतों के सामने नाकाफी हैं.
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि सचिव के शपथपत्र में पूरे राज्य में अशुद्ध या जंग लगे सर्जिकल ब्लेड की आपूर्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.
इसके मद्देनजर, कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए उचित कदम उठाएं और इस संबंध में किए गए कार्यों का विस्तृत शपथपत्र दायर करें.
साथ ही, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएस) को भी निर्देश दिया गया कि वे एक शपथपत्र दायर करें और राज्य के अस्पतालों में आवश्यक किट्स और उपकरणों की आपूर्ति सुनिश्चित करें ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें.
मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर, 2025 को निर्धारित की गई है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले की बारीकी से निगरानी करेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राज्य के अस्पतालों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों.