बायो-मेडिकल वेस्ट सुविधा पर IMA की याचिका खारिज
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरबा में बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा के लिए एक निजी कंपनी को दिए गए टेंडर को चुनौती देने वाली भारतीय चिकित्सा संघ (IMA), कोरबा शाखा की रिट याचिका को खारिज कर दिया है.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि IMA की कोरबा शाखा स्वयं उस समिति का हिस्सा थी, जिसने टेंडर को मंजूरी दी थी.
याचिका, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई थी, ने निजी कंपनी को दिए गए टेंडर को 'शुरुआत से ही अमान्य' घोषित करने की मांग की थी, क्योंकि कंपनी ने अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद भी काम शुरू नहीं किया था.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कंपनी द्वारा मांगी गई किसी भी अवधि विस्तार को खारिज करने और कोरबा डिवीजन के लिए कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा के लिए नया टेंडर जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.
सुनवाई के दौरान, महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने तर्क दिया कि याचिका मान्य नहीं थी, क्योंकि IMA, कोरबा शाखा, उस समिति का हिस्सा थी जिसने टेंडर आवंटन के लिए प्रस्ताव पारित किया था.
IMA के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.सी. शर्मा ने तर्क दिया कि संघ ने कंपनी द्वारा उद्धृत उच्च दरों पर मौखिक रूप से आपत्ति जताई थी. उन्होंने यह भी कहा कि याचिका 10 डॉक्टरों की ओर से दायर की गई थी, जो निजी नर्सिंग होम चलाते हैं और जिन्होंने याचिका दायर करने के लिए एक सदस्य को नामित किया था.
दस्तावेजों की समीक्षा के बाद, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता को पूरे IMA ने नहीं, बल्कि कुछ डॉक्टरों के समूह ने नामित किया था. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि चूंकि IMA उस समिति का हिस्सा था जिसने टेंडर को मंजूरी दी थी, इसलिए उसे इसे चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं था. पीठ ने हस्तक्षेप के लिए कोई आधार न पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया.
हालांकि, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि टेंडर 18 जुलाई 2019 को जारी किया गया था और काम 25 नवंबर 2019 को आवंटित किया गया था, लेकिन पर्यावरण मंजूरी लंबित होने के कारण अभी तक शुरू नहीं हुआ है. कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वे पर्यावरण मंजूरी आवेदन पर शीघ्र निर्णय लें ताकि काम में और देरी न हो.