HC ने 'पागलपन' के आधार पर व्यक्ति को बरी किया
HC ने 'कानूनी पागलपन' के आधार पर व्यक्ति को बरी किया
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 25 वर्षीय महेश वर्मा को अपने पिता और दादी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा से बरी कर दिया. कोर्ट ने पाया कि महेश उस समय 'कानूनी पागलपन' की स्थिति में थे.
हाईकोर्ट ने कहा कि धमतरी निवासी महेश को 2021 में हुई इस घटना के समय मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के सबूत मिले. उनके वकील अभिषेक सिन्हा ने तर्क दिया कि महेश को कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान सिर में चोट लगी थी, जिसके बाद से उनका रायपुर मेंटल हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था.
जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने महेश के मानसिक इलाज से संबंधित कोई दस्तावेज जमा नहीं किया.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 84 के तहत अपराध से छूट पाने के लिए 'कानूनी रुप से पागलपन' साबित करना जरूरी है, न कि 'चिकित्सकीय पागलपन'. इस आधार पर, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जज बिभु दत्ता गुरु ने महेश को बरी करने का फैसला सुनाया.
गौरतलब है कि 13 अप्रैल 2021 की रात, महेश ने अपनी मां से पानी मांगा, लेकिन मानसिक अस्थिरता के कारण उसे कमरे में बंद रखा गया था.
उनके पिता पन्नालाल ने दरवाजा खोला, जिसके बाद महेश ने खुद को 'हनुमान जी' और 'दुर्गा' बताते हुए अपने पिता और दादी पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई.
सत्र न्यायालय ने फरवरी 2024 में महेश को दोहरे हत्याकांड के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने अब पलट दिया.