छत्तीसगढ़: पूर्व IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर फिर गिरफ्तार
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों में एंटी-करप्शन ब्यूरो और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ACB/EOW) ने पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और चर्चित व्यवसायी अनवर ढेबर को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार कर विशेष अदालत के समक्ष पेश किया. अनिल टुटेजा को जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) में हुई अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि अनवर ढेबर की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले से जुड़ी है.
गौरतलब है कि ये दोनों ही आरोपी राज्य के चर्चित शराब घोटाले सहित अन्य मामलों में पहले से ही न्यायिक हिरासत में चल रहे थे.
अनिल टुटेजा के मामले में एसीबी/ईओडब्ल्यू की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विस्तृत जांच के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयान सामने आए हैं.
प्रथम दृष्टया यह स्थापित हुआ है कि टुटेजा ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए कमीशन के बदले अपने परिचित व्यक्तियों और फर्मों को डीएमएफ के तहत कार्य आवंटित किए थे.
उन्होंने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के माध्यम से इन परियोजनाओं का आवंटन सुनिश्चित किया और आर्थिक लाभ प्राप्त किया. एजेंसी ने मई 2025 में इस मामले में नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें अब टुटेजा की भूमिका की गहन जांच की जा रही है.
वहीं, रायपुर के पूर्व मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर को शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम भत्ते में हुई हेराफेरी के लिए पकड़ा गया है.
जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से लगभग 100 करोड़ रुपये का भुगतान ओवरटाइम के नाम पर किया गया था.
यह राशि कर्मचारियों को मिलने के बजाय एजेंसियों के माध्यम से नकद निकाल ली गई और अवैध कमीशन के रूप में अनवर ढेबर तक पहुंचाई गई.
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नवंबर 2023 में कुछ व्यक्तियों से नकद राशि जब्त कर राज्य सरकार को सूचित किया था, जिसके बाद 2024 में प्राथमिकी दर्ज की गई. फिलहाल, अदालत ने दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए एसीबी की हिरासत में भेज दिया है.