भारत माला 'घोटाले' में चार्जशीट दायर, 2 अधिकारी और 8 निजी व्यक्ति नामजद
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने सोमवार को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में 32 करोड़ रुपये के भारत माला भूमि अधिग्रहण घोटाले में 7,500 पन्नों की एक विशाल चार्जशीट दायर की है. इस मामले में वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों और निजी व्यक्तियों पर भूमि अधिग्रहण के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये के मुआवजे का गबन करने का आरोप है.
क्राइम नंबर 30/2025 के तहत दर्ज इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. चार्जशीट में सरकारी अधिकारी गोपाल राम वर्मा और नरेंद्र कुमार नायक के साथ-साथ निजी व्यक्ति उमा तिवारी, केदार तिवारी, हरमीत सिंह खनूजा, विजय कुमार जैन, खेमराज कौशले, पुन्नूराम देशलहरे, भोजराम साहू, और कुंदन बघेल को नामजद किया गया है.
धोखाधड़ी के मुख्य बिंदु
जांच रायपुर–विशाखापट्टनम राजमार्ग परियोजना के लिए नायकबंधा, टोकरो, और उरला गांवों में भूमि अधिग्रहण में हुई अनियमितताओं से संबंधित है. EOW ने धोखाधड़ी के तीन प्रमुख तरीके बताए हैं:
फर्जी बैकडेटेड बँटवारा (Partition) और नामांतरण (Mutation): राजस्व अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर भू-अभिलेखों में जाली बदलाव किए, ताकि मुआवजे की बढ़ी हुई राशि का दावा किया जा सके.
दोहरा मुआवजा भुगतान: ऐसी ज़मीन के लिए भी दोबारा भुगतान किया गया, जिसका अधिग्रहण पहले ही नायकबंधा जलाशय परियोजना के तहत हो चुका था.
जाली दस्तावेज़ों का प्रयोग: आरोपी उमा तिवारी के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए अवैध रूप से भूमि के टाइटल ट्रांसफर किए गए और भुगतान लिया गया.
एजेंसी के अनुसार, इन अनियमितताओं से राज्य के खजाने को अनुमानित 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसमें फर्जी बँटवारे से 28 करोड़ रुपये, दोहरे भुगतान से 2 करोड़ रुपये, और फर्जी टाइटल ट्रांसफर से 2 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है.
जांचकर्ताओं ने पाया कि राजस्व अधिकारियों ने बिचौलियों से मिलीभगत की, जिन्होंने किसानों को "अधिक मुआवजे" का लालच दिया.
हरमीत सिंह खनूजा के नेतृत्व वाले दलालों ने फर्जी दस्तावेज़ बनाए, बैकडेटेड एंट्रीज़ दर्ज कीं, और किसानों के कोरे चेक और RTGS फॉर्म हासिल किए.
इसके बाद, बढ़ी हुई मुआवजे की राशि को निजी और प्रॉक्सी खातों में गबन कर लिया गया.