कस्टम मिलिंग घोटाला: अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक, कस्टम मिलिंग घोटाला में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सोमवार को रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर (पूर्व रायपुर महापौर एजाज ढेबर के भाई) के खिलाफ 1,500 पन्नों का आरोप पत्र (chargesheet) दाखिल कर दिया है.
रायपुर की विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में दायर इस आरोप पत्र में दोनों आरोपियों पर आपराधिक साजिश (IPC की धारा 120-बी), जबरन वसूली (धारा 384), आपराधिक विश्वास भंग (धारा 409) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं (धारा 11, 13(1)(a) और 13(2)) के तहत आरोप लगाए गए हैं. दोनों आरोपी वर्तमान में रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं.
इससे पहले, फरवरी 2025 में, EOW ने इसी मामले में कारोबारी रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ अपना पहला आरोप पत्र दाखिल किया था.
₹20 करोड़ की अवैध वसूली का आरोप-
EOW द्वारा जारी बयान के अनुसार, जांच में पाया गया कि अनिल टुटेजा ने छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के सदस्यों के साथ मिलकर "कस्टम मिलिंग" के नाम पर राइस मिलरों से अवैध वसूली की साजिश रची थी. जांच में पता चला है कि इस अवैध वसूली के माध्यम से टुटेजा और उनके साथियों ने कम से कम ₹20 करोड़ का अनुचित लाभ कमाया.
वसूली का तरीका: राइस मिलरों पर रिश्वत देने का दबाव बनाने के लिए, मार्केटिंग फेडरेशन के अधिकारियों पर उनके बिलों के भुगतान में जानबूझकर देरी करने का दबाव बनाया गया.
रिश्वत की दर: मिलरों को अपना बकाया चुकाने के लिए प्रति क्विंटल ₹20 की दर से रिश्वत देनी पड़ती थी.
अनवर ढेबर की भूमिका
EOW के अनुसार, अनवर ढेबर, जो 2022-23 के दौरान राजनीतिक रूप से प्रभावशाली थे, ने अवैध धन के संग्रहण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों ने पुष्टि की कि ढेबर न केवल शराब घोटाले में शामिल थे, बल्कि पिछली सरकार के दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) और वन विभाग जैसे अन्य प्रमुख सरकारी विभागों पर भी उनका प्रभाव था. जांचकर्ताओं का दावा है कि ढेबर ने टुटेजा की ओर से मिलरों से वसूले गए धन का प्रबंधन, खर्च और निवेश किया.
EOW ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े रामगोपाल अग्रवाल और अन्य संदिग्धों के खिलाफ अभी भी जांच जारी है.
सत्ता परिवर्तन के बाद सामने आए इस कस्टम मिलिंग घोटाले में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान धान खरीद और राइस मिलरों को भुगतान के लिए निर्धारित भारी धनराशि की हेराफेरी के आरोप शामिल हैं.