छत्तीसगढ़: अब मुख्यधारा की पुलिसिंग संभालेंगे डीआरजी और बस्तर फाइटर्स
रायपुर । संवाददाता: केंद्र सरकार द्वारा भारत को 'माओवाद मुक्त' घोषित किए जाने के बाद, अब क्षेत्र के विशेष नक्सल विरोधी दस्ते डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और बस्तर फाइटर्स को नियमित पुलिसिंग में तैनात किया जाएगा. बस्तर के सात जिलों में लगभग 4,000 कमांडो अब जंगलों में सर्च ऑपरेशन के बजाय थानों में कानून-व्यवस्था, अपराध जांच और ट्रैफिक प्रबंधन की कमान संभालेंगे.
यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने संसद में देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होने की जानकारी दी.
सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च, 2026 की समय सीमा से ठीक पहले आए इस बदलाव को क्षेत्र में शांति की स्थायी बहाली के रूप में देखा जा रहा है.
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. के अनुसार, इन जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसमें फॉरेंसिक प्रक्रिया और विवेचना जैसे विषय शामिल होंगे.
विशेष रूप से महिला कमांडो को मानव तस्करी और महिला संबंधी अपराधों को सुलझाने के लिए तैयार किया जाएगा.
स्थानीय भाषा और भूगोल के जानकार इन जवानों की तैनाती से दूरदराज के आदिवासी इलाकों में पुलिस की पहुंच और बेहतर होगी. जहां राज्य सरकार अब स्पेशल टास्क फोर्स के भविष्य पर निर्णय लेगी, वहीं केंद्रीय सुरक्षा बलों की वापसी का फैसला केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा.