छत्तीसगढ़ नागरिक समूह ने किंग चार्ल्स III से वापस मांगा सांची की यक्षी और कोहिनूर हीरा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के एक नागरिक समाज समूह ने भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों पर अपना दावा मजबूत करते हुए ब्रिटिश सम्राट किंग चार्ल्स III को एक कड़ा पत्र लिखा है. डॉ. कुलदीप सोलंकी के नेतृत्व में इस समूह ने सांची की दुर्लभ यक्षी प्रतिमा, छत्रपति शिवाजी महाराज के 'वाघ नख', जगदंबा तलवार और विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा सहित सैकड़ों पुरावशेषों को भारत वापस लाने की मांग की है.
'पंजीकृत डाक और राजनयिक चैनलों' के माध्यम से भेजे गए इस पत्र में ब्रिटिश शासन के दौरान ले जाई गई इन वस्तुओं को "औपनिवेशिक लूट का प्रतीक" बताया गया है.
समूह ने स्पष्ट समय सीमा निर्धारित करते हुए मांग की है कि शिवाजी महाराज से जुड़ी वस्तुएं 6 जून 2026 तक और कोहिनूर सहित 211 अन्य दुर्लभ कलाकृतियां 15 अगस्त 2026 तक लौटाई जाएं.
मांग पत्र में सांची की कलाकृतियों के अलावा अमरावती के मार्बल्स, अशोक के शिलालेख, चोल कांस्य प्रतिमाएं और सिंधु घाटी सभ्यता के आभूषणों का भी जिक्र किया गया है.
पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में ये वस्तुएं वापस नहीं मिलीं, तो अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का दरवाजा खटखटाया जाएगा, जिसमें ऐतिहासिक क्षतिपूर्ति के तौर पर 5 ट्रिलियन डॉलर के हर्जाने का दावा भी शामिल होगा.