नारायणपुर में 16 नक्सली कैडरों ने डाला हथियार, 25 सालों में 5315 नक्सली सरेंडर
नारायणपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से एक और सकारात्मक खबर सामने आई है. नारायणपुर जिले के पुलिस मुख्यालय में बुधवार 8 सितंबर को 16 सक्रिय नक्सली सदस्यों ने अपनी बंदूकों को तिलांजलि दे दी. इनमें से ज्यादातर माड़ डिवीजन, उत्तर ब्यूरो और कुतुल क्षेत्र के कुख्यात कैडर शामिल थे, जिनके सिर पर कुल 38 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
यह घटना बस्तर क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है.
पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि माड़ डिवीजन के नक्सल प्रभावित इलाकों से यह सरेंडर अभियान की बड़ी सफलता है. उन्होंने बताया कि ये कैडर लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में लिप्त थे, लेकिन अब वे शांति की राह चुन रहे हैं.
एसपी ने जोर देकर कहा कि सरेंडर नीति के तहत इन लोगों को पुनर्वास का पूरा सहयोग दिया जाएगा, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में आसानी से शामिल हो सकें.
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पत्तलिंगम ने इस मौके पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे क्षेत्र में बदलाव की हवा का संकेत बताया.
उन्होंने कहा, "ये 16 युवा अब हिंसा और डर के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर विकास, पढ़ाई और शांति की ओर बढ़ना चाहते हैं. यह न सिर्फ इनके और उनके अपनों के लिए नया अध्याय खोलेगा, बल्कि पूरे बस्तर में स्थिरता और भरोसे की मजबूत नींव रखेगा."
आईजी ने युवाओं से अपील की कि वे ऐसी गलत राहों से दूर रहें और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं.
सरेंडर करने वालों में ये नाम शामिल हैं:
1- पोदिया मरकाम उर्फ रतन उर्फ फगनू, 2- मनोज दुग्गा उर्फ संकेर उर्फ शंकर उर्फ भारत, 3- सुमित्रा उर्फ सन्नी कुर्साम, 4- वनीला फरसा , 5- गावडे उर्फ दिवाकर
6- बुधु उर्फ कमलेश उसेण्डी, 7- मड्डा कुंजाम उर्फ सोनारू, 8- रवि उर्फ गोपाल वड्डे , 9- कारे कोर्राम , 10- सोमलो कश्यप उर्फ मनीषा , 11- नरसू वड्डे , 12- सोनू जटी, 13- इरगू वड्डे, 14- बुधनी गोटा उर्फ रेश्मा, 15- राजे गोटा उर्फ वनिता, 16- मासे गोटा उर्फ ललिता.
यह सरेंडर नक्सलवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जहां धीरे-धीरे युवा हिंसा त्यागकर बेहतर भविष्य की तलाश कर रहे हैं.
SAPT के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल छत्तीसगढ़ में 332 नक्सलियों ने सरेंडर किया था जबकि इस साल 2025 में 6 अक्टूबर तक 843 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. जहां तक छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद अर्थात् पिछले 25 सालों की बात है तो कुल 5315 नक्सलियों ने 6 अक्टूबर तक सरेंडर किया है.
इसी तरह से आंध्रप्रदेश में साल 2025 में अब तक 37 नक्सलियों ने सरेंडर किया है तथा पिछले 25 सालों में कुल 3902 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.
बिहार में इस साल 2 नक्सलियों ने सरेंडर किया है तथा पिछले 25 सालों में कुल 444 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.
झारखंड में साल 2025 में 15 नक्सलियों ने सरेंडर किया है तथा पिछले 25 सालों में कुल 390 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.
केरल में साल 2024 में 2 नक्सलियों ने सरेंडर किया था.
मध्यप्रदेश में साल 2013 में 1 नक्सली ने सरेंडर किया था.
महाराष्ट्र में साल 2025 में 30 नक्सलियों ने सरेंडर किया था. पिछले 25 सालों में कुल 342 नक्सलियों ने सरेंडर किया था.
ओडिशा में साल 2025 में 4 नक्सलियों ने सरेंडर किया था. पिछले 25 सालों में 7318 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. ओडिशा में साल 2022 में 2498, साल 2016 में 1871, साल 2015 में 1232 तथा साल 2013 में 1152 नक्सलियों ने सरेंडर किया था.
तेलंगाना में साल 2025 में 390 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. पिछले 12 सालों में कुल 720 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.
पश्चिम बंगाल में साल 2022 में 1 नक्सली ने सरेंडर किया तथा पिछले 9 सालों में 66 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.