बस्तर के विस्थापितों की घर वापसी, शुरू हुई पुनर्वास की तैयारी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग के उन हजारों परिवारों को वापस लाने और उन्हें फिर से बसाने की एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है, जो पड़ोसी राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में जाकर बस गए थे. मंत्रालय महानदी भवन में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस पुनर्वास कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई.
राष्ट्रीय जनजातीय आयोग के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि अपने घर से दूर रह रहे लोगों को फिर से अपनी जमीन और समाज से जोड़ा जा सके.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के लगभग 6,939 परिवारों के 31,098 लोग फिलहाल तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभिन्न गांवों में रह रहे हैं. इनमें से सबसे ज्यादा लोग सुकमा जिले के हैं.
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वे अनुसार जिला दंतेवाड़ा से तेलंगाना प्रदेश के 60 ग्राम में 618 परिवार के 2654 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से तेलंगाना प्रदेश के 293 ग्राम में 2733 परिवार के 12026 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से तेलंगाना प्रदेश के 114 ग्राम में 994 परिवार के 5029 व्यक्ति प्रवासित है.
इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति प्रवासित है.
इसी तरह जिला दंतेवाड़ा से आंध्रप्रदेश के 25 ग्राम में 125 परिवार के 568 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से आंध्रप्रदेश के 155 ग्राम में 2462 परिवार के 10787 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से आंध्रप्रदेश के 04 ग्राम में 07 परिवार के 34 व्यक्ति प्रवासित है.
इस तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है.
इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति प्रवासित है.
प्रशासन ने इन विस्थापितों की सही जानकारी जुटाने के लिए संबंधित जिला कलेक्टरों को 15 दिनों के भीतर सर्वे रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं. बैठक में यह भी तय किया गया कि बस्तर के अधिकारी पड़ोसी राज्यों के अफसरों से संपर्क कर इन परिवारों के बारे में और अधिक पुख्ता जानकारी जुटाएंगे, ताकि उनके मूल गांव और निवास स्थान के आधार पर बेहतर पुनर्वास नीति बनाई जा सके.
इस पूरी योजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत और कृषि जैसे विभिन्न विभागों को मिलकर काम करने को कहा है. सभी विभागों से जल्द ही नोडल अधिकारी नियुक्त करने की अपेक्षा की गई है ताकि विस्थापितों को वापस आने पर बुनियादी सुविधाएं, रोजगार और सुरक्षा आसानी से मिल सके.
इस उच्च स्तरीय बैठक में बस्तर के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ कई विभागों के प्रमुख सचिव भी शामिल हुए, जिससे स्पष्ट है कि सरकार इस मानवीय मुद्दे को सुलझाने के लिए पूरी तरह गंभीर है.