सोम, 19 अक्टू. 2026

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CGPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष समेत 7 आरोपी, ₹45 लाख रिश्वत का खुलासा

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23 सित. 2026, 02:33 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

टामन सिंह सोनवानी
टामन सिंह सोनवानी

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) परीक्षा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर की विशेष अदालत में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की है. ED की जांच में खुलासा हुआ है कि सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने एक उद्योगपति के बेटे और बहू को मेरिट लिस्ट में ऊंची रैंक दिलाने के बदले ₹45 लाख की रिश्वत ली. इस रिश्वत राशि को सोनवानी द्वारा नियंत्रित एक संस्थान में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फ़ंड के रूप में दिखाकर जायज ठहराने की कोशिश की गई. जांच एजेंसी ने अब तक इस पूरे मामले में कुल ₹3.28 करोड़ का 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध से हासिल राशि) चिन्हित किया है.


पूर्व अध्यक्ष और तत्कालीन अधिकारियों सहित 7 आरोपी नामांकित


ED द्वारा दायर अभियोजन शिकायत में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण गोयल, सीजीपीएससी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन पीए के रिश्तेदार उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर, डॉ. विकास चंद्राकर और तत्कालीन ओएसडी (अपर कलेक्टर) चेतन बोरघरिया को मुख्य आरोपी बनाया गया है. एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने मिलीभगत कर भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और धनशोधन को अंजाम दिया.

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CSR फ़ंड के नाम पर रिश्वत और रिश्तेदारों का चयन


जांच में सामने आया कि बजरंग पावर एंड इस्पात के निदेशक श्रवण गोयल के बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को 2021 की राज्य सेवा परीक्षा में क्रमशः तीसरी और चौथी रैंक दिलाकर चयनित कराया गया. इसके एवज में कंपनी के CSR माध्यम से ₹45 लाख 'ग्रामीण विकास समिति' (GVS) को हस्तांतरित किए गए, जिसका नियंत्रण सोनवानी के पास था. यही नहीं, सीजीपीएससी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर इस समिति के कोषाध्यक्ष और बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता भी थे. सोनवानी पर अपने सगे भतीजों और भतीज-बहुओं को भी डिप्टी कलेक्टर तथा उप पुलिस अधीक्षक जैसे शीर्ष पदों पर चयनित कराने का गंभीर आरोप है.


पेपर लीक और 3.13 करोड़ रुपये की दूसरी उगाही


मामले की दूसरी धारा अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र दिलाने के नाम पर की गई सीधी उगाही से जुड़ी है. ED के मुताबिक, उम्मीदवारों और उनके परिजनों से प्रति सीट ₹50 लाख से ₹60 लाख तक की मांग की गई थी, जिसके माध्यम से ₹3.13 करोड़ एकत्र किए गए. डॉ. विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को तलाशने और उनसे रकम जुटाने वाले बिचौलिए की भूमिका निभाई, जिसे बाद में अनिल चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर तक पहुँचाया गया.


शादी के मंडप से रिसॉर्ट तक: ऐसे लीक हुआ पर्चा


जांच एजेंसी ने पर्चा लीक करने के तौर-तरीकों का ब्योरा देते हुए बताया कि प्रारंभिक परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उत्कर्ष चंद्राकर ने रायपुर के 'सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस' में लगभग 30 उम्मीदवारों को एकत्र कर लीक हुआ प्रश्नपत्र बांटा था. इसके अलावा, मुख्य परीक्षा से पहले बलौदाबाज़ार के बारनवापारा और रायपुर के होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में अभ्यर्थियों के ठहरने तथा उत्तर तैयार कराने का आवासीय इंतज़ाम किया गया था. जब परिणाम के बाद कई अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ, तो उन्होंने पैसे वापस मांगने शुरू किए, जिसके बाद राजनीतिक हस्तक्षेप से मामलों को दबाने और पैसों के निपटारे की कोशिशें की गईं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP