अरावली की परिभाषा के लिए 10 सदस्यीय समिति को केंद्र की हरी झंडी
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने अरावली पर्वतमाला और उसकी श्रेणियों के लिए एक समान परिभाषा निर्धारित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति पर अपनी सहमति दे दी है. सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसे केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा सुझाए गए नामों पर कोई आपत्ति नहीं है.
यह समिति अरावली क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही 'परिभाषा की अस्पष्टता' को दूर करने का काम करेगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन क्षेत्रों को अरावली के दायरे में माना जाए और कहाँ पर्यावरण संरक्षण के कड़े नियम लागू हों.
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचन देवी इस समिति की अध्यक्षता करेंगी.
उनके साथ इस पैनल में भारतीय वन सर्वेक्षण, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और सर्वे ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त व सेवारत अधिकारियों सहित जाने-माने शिक्षाविदों को शामिल किया गया है.
मंत्रालय का मानना है कि अरावली जैसे संवेदनशील विषय के लिए विशेषज्ञों द्वारा व्यापक विश्लेषण और हितधारकों के साथ परामर्श अनिवार्य है.
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अरावली की नई परिभाषा पर उठ रहे विवादों के चलते नवंबर के अपने निर्देशों पर रोक लगा दी थी और खनन गतिविधियों को भी स्थगित कर दिया था. अब यह नई समिति तय करेगी कि क्या 100 मीटर की ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर के अंतर जैसे मानदंड इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला के संरक्षण को प्रभावित कर रहे हैं.