बैलाडीला में लौह अयस्क खनन विस्तार को केंद्र की हरी झंडी
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बैलाडीला रिजर्व फॉरेस्ट (BRF) की 874.924 हेक्टेयर वन भूमि को खनन के लिए डायवर्ट करने और एनएमडीसी (NMDC) के लौह अयस्क खनन विस्तार को पर्यावरणीय मंजूरी (EC) देने की सिफारिश की है. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने अपनी 57वीं बैठक में 'डिपॉजिट-11' के लिए इस प्रस्ताव को मंजूरी दी.
इस परियोजना का लक्ष्य लौह अयस्क के उत्पादन को 11.30 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) से बढ़ाकर 14.50 MTPA करना और अपशिष्ट उत्खनन को 15.39 MTPA तक ले जाना है.
बैलाडीला की पहाड़ियां अपनी उच्च श्रेणी के हेमेटाइट भंडार के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हैं, जहाँ वर्तमान में 351.32 मिलियन टन खनन योग्य भंडार मौजूद है.
हालांकि, इस विस्तार योजना ने पर्यावरणीय और सामाजिक चिंताओं को फिर से गरमा दिया है. दंतेवाड़ा में स्थानीय युवाओं और राजनीतिक समूहों ने 5 जनवरी से ही इस प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं.
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि खनन विस्तार से क्षेत्र के प्राचीन पेड़ों, जल स्रोतों और दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
यह वन क्षेत्र जैव विविधता के मामले में अत्यंत समृद्ध है, जहाँ स्लॉथ बियर, तेंदुए, भारतीय पैंगोलिन और विशाल उड़ने वाली गिलहरी जैसे स्तनधारी जीव पाए जाते हैं.
साथ ही, यह क्षेत्र राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना और कई दुर्लभ प्रजातियों का भी बसेरा है. विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति दस्तावेजों के अनुसार, एनएमडीसी ने एक स्थल-विशिष्ट संरक्षण योजना तैयार की है और इसके कार्यान्वयन के लिए दंतेवाड़ा वन प्रभाग के पास 10.25 करोड़ रुपये जमा किए हैं. गौरतलब है कि इस भूमि के लिए वन मंजूरी पहले ही 2020 में मिल चुकी है, जो सितंबर 2037 तक वैध है.