रैनिटिडीन दवा पर केंद्र सरकार सख्त
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने गैस और एसिडिटी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रैनिटिडीन दवाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है. इन दवाओं में कैंसर पैदा करने वाले तत्व एन-नाइट्रोसोडाइमिथाइलमाइन की मौजूदगी की जांच के लिये केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश जारी किये हैं.
रैनिटिडीन, एक हिस्टामिन-2 ब्लॉकर दवा, का उपयोग आमतौर पर पेट दर्द, एसिडिटी, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग और गैस्ट्रिक अल्सर के इलाज में किया जाता है. लेकिन लंबे समय से इसके अत्यधिक उपयोग से कैंसर का खतरा होने की आशंका जताई जा रही है.
2019 में अमरीका की खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने रैनिटिडीन में कैंसरकारी तत्व होने का दावा किया था, जिसके बाद 2020 में वहां इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया. भारत में भी इस दवा की जांच शुरू हुई.
CDSCO ने राज्यों को निर्देश दिया है कि रैनिटिडीन के उत्पादन के दौरान एन-नाइट्रोसोडाइमिथाइलमाइन की मात्रा की जांच की जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि दवा लंबे समय तक दुकानों में स्टॉक न रहे.
पिछले साल दिसंबर में गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया है. इस दवा के दुष्प्रभावों, खासकर पेट, खाद्यनलिका और मूत्राशय के कैंसर से संबंधित जोखिमों की जांच के लिये गहन परीक्षण जारी है.