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इंदौर जल प्रदूषण मामले पर केंद्र गंभीर, बदली जाएंगी पाइपलाइनें

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03 फ़र. 2026, 04:25 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

नल का पानी
नल का पानी

नई दिल्ली । डेस्क: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. सोमवार, 2 फरवरी 2026 को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया कि केंद्र सरकार अमृत (AMRUT) और अमृत 2.0 जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकारों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है. 


मंत्री ने स्वीकार किया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में जल आपूर्ति की पाइपलाइनें 1997 की हैं, जो काफी पुरानी और क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. इंदौर नगर निगम ने इन पुरानी लाइनों को चिन्हित कर लिया है और इन्हें अमृत 2.0 योजना के तहत बदलने का कार्य शामिल किया गया है.

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दिसंबर के अंत से भागीरथपुरा में डायरिया और उल्टी के कारण कई लोगों की जान जाने की खबरों के बीच मंत्री ने स्पष्ट किया कि इंदौर शहर के लिए अमृत 2.0 के तहत जल आपूर्ति परियोजनाओं के चार पैकेज तैयार किए गए हैं. इनमें से पहले पैकेज का काम शुरू हो चुका है, जबकि शेष तीन पैकेज अभी मंजूरी के चरण में हैं. 


इस परियोजना का उद्देश्य जल स्रोत के विकास से लेकर उपचार, भंडारण और वितरण तक की पूरी प्रणाली का आधुनिकीकरण करना है. 


राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जल प्रदूषण रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है. 


पूरे प्रदेश में अब तक 14,181 लीकेज पाए गए हैं, जिनमें से 12,634 की मरम्मत कर दी गई है. साथ ही, 80,976 जल नमूनों की जांच की गई, जिसमें से फेल हुए 656 नमूनों के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है. इंदौर में वर्तमान में 1,142 करोड़ रुपये की दो जल आपूर्ति योजनाएं और 534 करोड़ रुपये की सीवरेज योजनाएं अमृत 2.0 के तहत स्वीकृत की गई हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP