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भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप चोरी मामले की जांच अब CBI को मिली

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29 सित. 2026, 01:55 PM 3 मिनट में पढ़ें 5

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रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से करोड़ों रुपये के लोहे के स्क्रैप चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले की जांच औपचारिक रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी है. राज्य सरकार के गृह विभाग ने 25 सितंबर 2026 को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम की धारा 6 के तहत अधिसूचना जारी कर सीबीआई को राज्यभर में कार्रवाई करने की सहमति दे दी. दुर्ग जिले के पुरानी भिलाई थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 277/2026 की विस्तृत जांच अब केंद्रीय एजेंसी करेगी. इस बहुचर्चित मामले में स्टील प्लांट के उच्च अधिकारियों, ट्रांसपोर्टरों, स्क्रैप कारोबारियों और निजी इस्पात कंपनियों के बीच गहरे साठगांठ का पर्दाफाश हुआ है.


फ्लू डस्ट की आड़ में लोहे की तस्करी और बड़े पैमाने पर जब्ती


इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश 26 मई को हुआ था, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि संयंत्र से निकलने वाली राख यानी 'फ्लू डस्ट' की आड़ में कीमती आयरन स्क्रैप बाहर भेजा जा रहा है. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहनों को जब्त किया और हाथखोज स्थित 'ए.के. ट्रेडर्स' के परिसर में छापेमारी की. वहां से लगभग 250 टन लोहे की प्लेटें, बीम, कटिंग और अन्य कीमती स्क्रैप बरामद किया गया. जब्त किए गए स्क्रैप का बाजार मूल्य लगभग 90 लाख रुपये आंका गया, जबकि जब्त वाहनों और मशीनों को मिलाकर कुल संपत्ति का मूल्य 3.22 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया.

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व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम में सेंध और बदल दी जाती थीं नंबर प्लेटें


पुलिस जांच में सामने आया कि बीएसपी के ब्लास्ट फर्नेस-2 से फ्लू डस्ट परिवहन के लिए अनुबंधित गाड़ियां एसएमएस-III यार्ड में जाती थीं, जहां डस्ट के नीचे लोहे का भारी स्क्रैप छिपा दिया जाता था. इस अवैध गतिविधि को छुपाने के लिए आरोपियों ने व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) के साथ गंभीर छेड़छाड़ की. वजन और कांटा पर्ची की औपचारिकता पूरी होने के बाद वाहनों से जीपीएस डिवाइस हटा दिए जाते थे ताकि उनकी गतिविधियों की ट्रैकिंग न हो सके. इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों से बचने के लिए गाड़ियों की फर्जी नंबर प्लेटें इस्तेमाल करने और एक गाड़ी का नंबर दूसरी पर लगाने जैसे तरीके अपनाए जाते थे.


महाप्रबंधक समेत कई अफसर और निजी कंपनी के मालिक गिरफ्तार


मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस अब तक कुल 21 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. जांच का दायरा बढ़ा तो 10 जुलाई को बीएसपी के एसएमएस-3 के जनरल मैनेजर (जीएम) हिमांशु भूषण मलिक और इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज कुमार देवांगन को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद चोरी का स्क्रैप खरीदने वाली निजी कंपनियों पर शिकंजा कसा गया, जिसमें रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विनोद कुमार गर्ग और निदेशक संदीप कुमार सिंह की गिरफ्तारी शामिल है. पुलिस की जांच में यह बात पुख्ता हुई कि बीएसपी से चुराया गया माल निजी उद्योगों में कच्चे माल के रूप में खपाया जा रहा था.


सीबीआई खंगालेगी वित्तीय लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य


भिलाई पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों की सघन जांच कर नकद जमा और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड जुटाया है. इसके साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), आईपीडीआर और सब्सक्राइबर डिटेल्स सहित व्यापक डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए गए हैं. राज्य सरकार द्वारा मामला सीबीआई को स्थानांतरित किए जाने के बाद अब केंद्रीय एजेंसी इस पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और इसमें शामिल अन्य संभावित बड़े चेहरों की भूमिका की बारीकी से जांच करेगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP