पंजाब के CM भगवंत मान के कैंप कार्यालय समेत 8 ठिकानों पर CBI का छापा
चण्डीगढ़ । डेस्क: पंजाब की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर घुम्मन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आठ ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. सीबीआई की टीम ने चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय (कोठी नंबर 50) पर भी दबिश दी.
यह पूरी कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश के तुरंत बाद हुई, जिसमें कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था.
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, यह जांच ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडरों, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और नीतिगत फैसलों में रिश्वतखोरी और राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों के इर्द-गिर्द घूमती है. एफआईआर में ओएसडी राजबीर घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देवेंद्र और आरएस नागरा समेत कई अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों को नामजद किया गया है.
आरोप है कि यह सिंडिकेट पैसे लेकर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तैनाती प्रभावित करता था और सरकारी नीतियों तथा आदेशों के ड्राफ्ट जारी होने से पहले ही बिचौलियों तक पहुंचा देता था.
सीबीआई टीमों ने चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली. इस दौरान भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, लैपटॉप, मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है.
जांच एजेंसी का कहना है कि रिश्वतखोरी के वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक गड़बड़ियों के सबूत जुटाने के लिए यह कार्रवाई बेहद अहम है. संगरूर स्थित घुम्मन के पैतृक गांव घराचों में भी सीबीआई ने पड़ताल की.
इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पंजाबी में लिखा कि भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार और उन्हें बदनाम करने के लिए ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है, क्योंकि भाजपा जनता के प्यार और समर्थन से घबरा गई है.
गौरतलब है कि ईडी ने मई महीने में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत छापेमारी के बाद पंजाब पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा था. राज्य पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने पुलिस की ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है.