दिवाली के दिन बुझ गया 'अंग्रेजों के जमाने के जेलर' का दीया
दिवाली के दिन बुझ गया 'अंग्रेजों के जमाने के जेलर' का दिया
मुंबई । डेस्क: अपनी ज़बरदस्त कॉमिक टाइमिंग से हिंदी सिनेमा के दर्शकों को हंसाने वाले दिग्गज अभिनेता गोवर्धन असरानी का सोमवार 20 अक्टूबर, 2025 को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 84 वर्ष के थे.
फ़िल्म इंडस्ट्री में असरानी के नाम से मशहूर, उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं, लेकिन उन्हें सबसे ज़्यादा पहचान 1975 की सुपरहिट फ़िल्म "शोले" में सनकी जेलर के किरदार से मिली. उनका यह डायलॉग, "हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं", आज भी लोगों की ज़ुबान पर है और हँसी पैदा करता है. इस किरदार को लेखक सलीम-जावेद ने चार्ली चैपलिन की "द ग्रेट डिक्टेटर" से प्रेरित होकर गढ़ा था.
असरानी के मैनेजर बाबूभाई थीबा ने बताया कि अभिनेता को चार दिन पहले जुहू के भारतीय आरोग्य निधि अस्पताल में साँस लेने में तकलीफ़ के चलते भर्ती कराया गया था. थीबा ने कहा, "फेफड़ों में पानी जमा होने की वजह से आज दोपहर 3:00 बजे उनका निधन हो गया."
एफटीआइआइ से प्रशिक्षित होने के बावजूद, असरानी को अक्सर कॉमेडी रोल में ही देखा गया, जहाँ वह मुख्य रूप से हीरो के दोस्त की भूमिका निभाते थे. उन्होंने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, और आमिर खान जैसे हर दौर के शीर्ष सितारों के साथ काम किया.
उनके करियर की शुरुआत 1967 में 'हरे कांच की चूड़ियां' से हुई. ऋषिकेश मुखर्जी उनके मेंटर थे और उन्होंने अपनी लगभग हर फ़िल्म में उन्हें रोल दिया. उन्होंने गुलज़ार की 'मेरे अपने', 'कोशिश' और 'परिचय' जैसी फिल्मों में भी काम किया. 'आज की ताज़ा खबर' और 'छोटी सी बात' में उनके किरदारों को बहुत सराहा गया था.
2000 के दशक में, उन्होंने प्रियदर्शन की कई सफल कॉमेडी फ़िल्मों, जैसे 'हेरा फेरी', 'चुप चुप के', 'हंगामा', 'भूल भुलैया' और 'वेलकम' में काम करके अपनी लोकप्रियता बनाए रखी.
उद्योग जगत में कई लोगों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. अभिनेता अक्षय कुमार ने भावुक होते हुए लिखा, "असरानी जी के निधन से निःशब्द हूँ. अभी एक हफ़्ते पहले ही 'हैवान' के सेट पर उनसे गर्मजोशी से गले मिला था. वो बहुत प्यारे इंसान थे... उनकी कॉमिक टाइमिंग बेमिसाल थी. भगवान उनकी आत्मा को शांति दें."
फ़िल्मकार अनीस बज़्मी ने उन्हें एक शानदार अभिनेता और बेहतरीन इंसान बताया, जबकि गीतकार मनोज मुंतशिर ने लिखा, "अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर, आप कॉमेडी का एक ज़माना छोड़कर चले गए!" पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन ने उन्हें भारतीय सिनेमा का "सच्चा प्रतीक" बताया.
असरानी के परिवार ने उनकी इच्छा के अनुसार, अंतिम संस्कार को निजी रखा. उनका अंतिम संस्कार आज शाम सांताक्रूज़ श्मशान घाट पर किया गया, जिसमें सिर्फ़ परिवार और कुछ करीबी दोस्त शामिल हुए.