बंगाल वोटर लिस्ट: SC ने ओडिशा-झारखंड से मांगे न्यायिक अधिकारी
नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) कार्य को समय पर पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि यदि आवश्यक हो, तो कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के मुख्य न्यायाधीशों से संपर्क कर वहां के सेवारत और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं ले सकते हैं.
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी तक मतदाता सूची के प्रकाशन की समय सीमा को देखते हुए इस कार्य को 'युद्ध स्तर' पर पूरा करने की आवश्यकता है.
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मौजूदा संसाधनों के साथ 50 लाख लंबित मतदाताओं के सत्यापन में लगभग 80 दिन लग सकते हैं, जो उपलब्ध समय में संभव नहीं है. इसलिए, अब जिला जजों के अलावा तीन साल के अनुभव वाले सिविल जज (सीनियर और जूनियर डिवीजन) को भी इस कार्य में लगाया जाएगा.
टीएमसी सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी द्वारा भाषाई बाधा की आपत्ति जताए जाने पर सीजेआई ने टिप्पणी की कि ओडिशा और झारखंड ऐतिहासिक रूप से बंगाल का हिस्सा रहे हैं, इसलिए वहां के अधिकारी स्थानीय बोलियों को बेहतर समझ सकेंगे.
इसके साथ ही कोर्ट ने आधार कार्ड और माध्यमिक एडमिट कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करने की अनुमति दी है, हालांकि आधार की सत्यता और इसके कथित दुरुपयोग पर न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने चिंता व्यक्त करते हुए इसे वैधानिक नियमन का विषय बताया.
निर्वाचन आयोग इन अतिरिक्त अधिकारियों के यात्रा और ठहरने का खर्च वहन करेगा.