IG हो या IPS, कोई भी कानून के दायरे से बाहर नहीं है- सीएम साय
पेन्ड्रा । डेस्क: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही में आयोजित 13वीं शोक सभा में भाग लेते हुए आईजी रतनलाल डांगी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी समान हैं, चाहे पद कितना भी ऊंचा हो. दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई निश्चित है, ताकि न्याय की प्रक्रिया पर कोई सवाल न उठे.
मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची की मां के निधन पर हुई इस शोक सभा में सीएम साय ने परिवारजनों से मिलकर गहन संवेदना जताई. उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले. कार्यक्रम स्थल पर माहौल बेहद भावुक रहा, जहां बड़ी संख्या में लोग विधायक परिवार के दुख में शरीक हुए. प्रशासन ने सीएम के दौरे के लिए सुरक्षा और अन्य इंतजामों को पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया.
इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम और कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव भी उपस्थित थे. क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी तथा ग्रामीण भी सभा में शामिल होकर परिवार को सांत्वना प्रदान करने पहुंचे.
आईजी रतनलाल डांगी यौन उत्पीड़न मामला: विस्तृत जानकारी
छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में हड़कंप मचाने वाला यह मामला 23 अक्टूबर 2025 को सुर्खियों में आया, जब बिलासपुर में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. रतनलाल डांगी (आईजी रैंक) पर पिछले सात वर्षों से चले आ रहे कथित यौन उत्पीड़न और शारीरिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए. पीड़िता, जो पेशे से योग शिक्षिका हैं, ने 15 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में डीजीपी अशोक जुनेजा से लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने कई आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य (जैसे वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग्स और मैसेज) भी सौंपे.
पीड़िता के आरोप: सात वर्षों का उत्पीड़न
पीड़िता के अनुसार, यह सिलसिला 2017 में शुरू हुआ, जब डांगी कोरबा के एसपी थे. सोशल मीडिया के जरिए दोनों की बातचीत शुरू हुई, जो बाद में दंतेवाड़ा में उनकी तैनाती के दौरान वीडियो कॉल पर योग सिखाने के बहाने गहराती गई. राजनांदगांव और सरगुजा में आईजी बनने के बाद उत्पीड़न बढ़ा. बिलासपुर आईजी रहते हुए डांगी कथित तौर पर अपनी पत्नी की अनुपस्थिति में पीड़िता को सरकारी बंगले पर बुलाते थे और शारीरिक शोषण करते थे. न आने पर वे पीड़िता के पति (सब-इंस्पेक्टर) के तबादले की धमकी देते, यहां तक कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र भेजने की चेतावनी भी दी.
चंद्रखुरी पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में डांगी के निदेशक बनने के बाद भी यह जारी रहा. वे कथित तौर पर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक वीडियो कॉल पर दबाव बनाते, लोकेशन शेयर करने को मजबूर करते और मानसिक प्रताड़ना देते. पीड़िता ने शिकायत में कहा कि जब उन्होंने दूरी बनाने की कोशिश की, तो डांगी ने और सख्ती बरती. इसके अलावा, विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है.
आरोपी डांगी का पक्ष: ब्लैकमेलिंग की साजिश
डॉ. रतनलाल डांगी ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे ब्लैकमेलिंग का प्रयास बताया. उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखकर कहा कि पीड़िता कई वर्षों से उन्हें और उनके परिवार को धमका रही है. डांगी के मुताबिक, महिला ने उनके निजी क्षणों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी, घर की तस्वीरें खींचीं, जहर की शीशी लेकर दफ्तर पहुंचीं और आत्महत्या की धमकी दीं. उन्होंने दावा किया कि महिला ने उनके स्टाफ को निजी तस्वीरें दिखाकर हंगामा किया और पत्नी से संबंध न रखने की शर्त रखी. डांगी ने कहा कि उन्होंने पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों को इस ब्लैकमेल की शिकायत की थी, जिसके बाद महिला ने उल्टा आरोप लगाए. इस घटनाक्रम से उनका परिवार मानसिक तनाव में है.
डांगी का बैकग्राउंड
रतनलाल डांगी 2003 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्होंने बीजापुर, कांकेर, कोरबा और बिलासपुर जैसे जिलों में एसपी के रूप में सेवा की है. सरगुजा, दुर्ग और बिलासपुर रेंज में आईजी रह चुके हैं. वर्तमान में वे चंद्रखुरी पुलिस प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक हैं.
आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच
शिकायत मिलते ही डीजीपी ने तत्काल विभागीय जांच के आदेश दिए. जांच 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा को सौंपी गई है, जिसमें महिला अधिकारियों को भी शामिल किया गया. प्रक्रिया में पहले पीड़िता का बयान और साक्ष्य लिए जाएंगे, फिर डांगी का. फिलहाल रिपोर्ट की समयसीमा तय नहीं है.