रवि, 18 अक्टू. 2026

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बस्तर दशहराः डेरी गड़ाई रस्म के साथ रथ निर्माण शुरू

बस्तर दशहरा की डेरी गड़ाई रस्म संपन्न

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Hupendra Sharma

06 सित. 2025, 11:14 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा

जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण डेरी गड़ाई की रस्म शुक्रवार को निभाई गई. यह रस्म बस्तर दशहरा की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. इस रस्म के साथ बस्तर की आराध्य देवी दंतेश्वरी की परिक्रमा के लिए रथ निर्माण की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करने की अनुमति मिलती है.


इस मौके पर जनप्रतिनिधियों सहित स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे.

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करीब 600 वर्षों से चली आ रही इस परम्परानुसार बिरिंगपाल से लाई गई सरई पेड़ की टहनियों को एक विशेष स्थान पर स्थापित किया गया.


विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना कर इस रस्म की अदायगी के साथ ही रथ निर्माण के लिए मां दंतेश्वरी से आज्ञा ली गई.


इस रस्म के बाद रथ निर्माण की प्रक्रिया आरंभ करने के लिए लकड़ियों का लाना शुरू हो जाता है.

सरई लकड़ी की पूजाजगदलपुर के सिरासार भवन में दशहरा पर्व की दूसरी बड़ी रस्म डेरी गड़ाई की अदायगी की गई.


रियासत काल से चली आ रही इस रस्म में बिरिंगपाल गांव से सरई पेड़ की टहनियां लाई गई.


इन टहनियों को पूजा करने के बाद गड्ढों में गाड़ा गया. गड्ढ़ों के अंदर अंडा और जीवित मछलियां डाली गई.


मान्यता है कि इसी के साथ दशहरा रथ निर्माण प्रक्रिया को आरंभ करने की इजाजत मिल जाती है. इसके बाद ही रथ निर्माण का कार्य विधिवत शुरू किया जाता है.


इस कार्य को झाड़ उमरगांव और बेड़ा उमरगांव के संवरा जाति के कुशल कारीगर करेंगे.


ये कारीगर अपनी परंपरागत तकनीकों और औजारों का उपयोग करते हुए रथ को तैयार करेंगे.

हल्दी भी खेली गई

डेरी गड़ाई रस्म के अवसर पर महिलाओं ने हल्दी खेलने की परंपरा को भी निभाया. जिसमें वे एक-दूसरे पर हल्दी छिड़ककर उत्सव की खुशी को साझा करती हैं.


यह स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक एकता को दिखाता है. इसके साथ ही सामाजिक समरसता को भी मजबूत करती है.


इस अवसर पर उपस्थित बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष व बस्तर सांसद महेश कश्यप ने दशहरा का उल्लास बनाए रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया. साथ ही बताया कि इस बार राज्य सरकार के द्वारा बस्तर दशहरा भव्य रूप से मनाने के लिए एक करोड़ 30 लाख रुपए का बजट दिया जा रहा है.


रियासत काल से चली आ रही बस्तर दशहरा कि इन परम्पराओं का निर्वाह आज भी बखूबी किया जा रहा है.


डेरी गड़ाई की रस्म के बाद नवरात्रि के एक दिन पहले काछन जात्रा की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें एक कन्या को कांटों के झूलों में बैठाकर दशहरा पर्व मनाने की इजाजत मांगी जाएगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP