युक्तियुक्तकरण के विरोध में उतरा बस्तर का सर्वआदिवासी समाज
छत्तीसगढ़ के बस्तर में सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति का विरोध
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत लागू युक्तियुक्तकरण का बस्तर में भी सर्व आदिवासी समाज ने विरोध किया है. समाज के पदाधिकारियों ने बैठक कर इस नयी नीति को ग्रामीण व आदिवासी बच्चों को शिक्षा से वंचित करने वाली नीति बताया है.
समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि युक्तियुक्तकरण से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी. इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि बस्तर संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 300 शालाएं, जिनका अस्तित्व युक्तियुक्तकरण के चलते संकट में है.
उनका तत्काल पुनर्निर्माण करने सरकार पर दबाव बनाया जाएगा. आदिवासी समाज द्वारा बैठक में लिए गए निर्णय अनुसार पदाधिकारियों का कहना है कि इन स्कूलों को बंदकर बच्चों को दूरस्थ स्थानों में पढ़ाई के लिए मजबूर करना न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह आदिवासी बच्चों की शिक्षा के भविष्य पर कुठाराघात है.
इसके अलावा यह भी कहा गया है कि जिन शालाओं के भवन जीर्ण- शीर्ण अवस्था में हैं या एक ही भवन में एक से अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं, वंहा तत्काल निर्माण कार्य शुरू कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए.
बैठक कर समाज के सदस्यों ने मांग की है कि शासन द्वारा पूर्व में लागू 2008 की व्यवस्था जिसमें ग्रामीण शालाओं की संख्या और उनके अस्तित्व को बनाए रखने का निर्देश था, उसे पुनः बहाल किया जाए.
वहीं 2025 में लागू नई युक्तियुक्तकरण नीति को समाप्त किया जाए. इसके अलावा बैठक में उपस्थित समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर का कहना है कि उनकी यह भी मांग है कि जनप्रतिनिधि कर्मचारी और अधिकारीगण अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ना पढ़ाकर शासकीय स्कूलों में ही प्रवेश दिलाएं, जिससे शासकीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके.
व्यक्तियुक्तकरण से ग्रामीण इलाकों के बच्चों की शिक्षा होगी प्रभावित
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर का कहना है कि बस्तर के ग्रामीण अंचल में पहले ही प्राथमिक शाला से लेकर मिडिल और हाई स्कूल की दूरी गांवों से काफी ज्यादा है.
ऐसे में ग्रामीण अंचलों की कई प्राथमिक शालाओं को युक्तियुक्तकरण के तहत बंद किया जा रहा है. जिससे स्कूलों की दूरी बढ़ रही है.
यही नहीं ऐसे कई इलाके हैं जहां नदी नालों में पुल नहीं बनने की वजह से बरसात के मौसम में बच्चों को स्कूल जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
ऐसे में बस्तर संभाग के 1629 स्कूलों को बंद करना सरकार का गलत निर्णय है. सर्व आदिवासी समाज इसका विरोध करता है.
सर्व आदिवासी समाज की मांग है कि साल 2025 में लागू नयी युक्तियुक्तकरण नीति को अविलंब समाप्त किया जाए.
युक्तियुक्तकरण के विरोध में कांग्रेस शुरू करेगी आंदोलन
गौरतलब है कि पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने भी युक्तियुक्तकरण के विरोध में जल्द ही आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है. पीसीसी अध्यक्ष बैज का कहना है कि युक्तियुक्तकरण से एक तरफ जहां प्रदेश की अन्य स्कूलों के साथ-साथ बस्तर संभाग के 1629 स्कूल बंद हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई शिक्षकों की नौकरी भी खतरे में पड़ गई है.
सरकार केवल 5 हजार शिक्षकों की भर्ती करने की बात कहते हुए खानापूर्ति कर रही है, जबकि युक्तियुक्तकरण से 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी जाएगी.
ऐसे में युक्तियुक्तकरण के विरोध में आने वाले समय में कांग्रेस राजधानी रायपुर में जल्द आंदोलन शुरू करेगी.