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छत्तीसगढ़ में जल्द लागू होगा अधिवक्ता संरक्षण कानून

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17 जून 2026, 01:39 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

अधिवक्ता ज्ञापन
अधिवक्ता ज्ञापन

रायपुर । संवाददाता: न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वकीलों की सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य के करीब 36 हजार अधिवक्ताओं के कल्याण और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए प्रदेश में जल्द ही 'अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम' (Advocate Protection Act) लागू करने का ठोस आश्वासन दिया है. मुख्यमंत्री का कहना है कि वकीलों की सुरक्षा और उनका सम्मान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सर्वोपरि है और इस दिशा में तेजी से काम किया जाएगा.


यह आश्वासन मुख्यमंत्री ने सोमवार को छत्तीसगढ़ राज्य अधिवक्ता परिषद के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान दिया. परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पराशर और अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रशांत प्रभात तिवारी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर वकीलों के हितों से जुड़ी 11 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा. 

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इस चर्चा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी वकीलों को कानूनी सुरक्षा कवच देने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में ही इस विधेयक को पेश कर पारित कराया जाए.


इस कानून की पृष्ठभूमि पर बात करें तो ‘छत्तीसगढ़ अधिवक्ता संरक्षण विधेयक-2020’ का मसौदा पहले ही तैयार किया जा चुका है. इतना ही नहीं, इसी वर्ष 2 मार्च 2026 को विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस विधेयक के कई अहम प्रावधानों को हरी झंडी भी मिल चुकी है. 


परिषद का तर्क है कि न्यायिक दायित्वों को निभाते समय वकीलों को अक्सर गंभीर चुनौतियों और खतरों से जूझना पड़ता है, जिसके चलते एक विशेष सुरक्षा कानून का होना बेहद अनिवार्य हो गया है.


सुरक्षा के साथ-साथ बार काउंसिल ने दिवंगत वकीलों के परिवारों को मिलने वाली आर्थिक मदद का दायरा बढ़ाने की भी पुरजोर वकालत की है. बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए प्रतिनिधिमंडल ने मृत्युदावा सहायता राशि को मौजूदा दर से बढ़ाकर कुल 5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा है. वर्तमान व्यवस्था के तहत किसी अधिवक्ता के निधन पर उनके आश्रितों को अधिवक्ता कल्याण निधि से 1.50 लाख रुपये और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 1.50 लाख रुपये (कुल 3 लाख रुपये) मिलते हैं. 


परिषद की मांग है कि दोनों ही मदों में 1-1 लाख रुपये का इजाफा किया जाए, ताकि संकट की घड़ी में पीड़ित परिवारों को अधिवक्ता कल्याण निधि से 2.50 लाख और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 2.50 लाख रुपये की संबल राशि मिल सके. सीएम ने इन सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाने की बात कही है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP