आयुर्वेदिक दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर एक्शन, संसद में पेश हुए आंकड़े
नई दिल्ली । डेस्क: आयुष क्षेत्र में दवाओं के भ्रामक और आपत्तिजनक विज्ञापनों के खिलाफ केंद्र सरकार की मुहिम रंग लाती दिख रही है. मई 2025 में लॉन्च किए गए 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई करने के मामले में महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्य बनकर उभरे हैं.
आयुष मंत्रालय द्वारा हाल ही में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन राज्यों ने अपने पास आई लगभग सभी शिकायतों पर त्वरित कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की है.
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा के ताजा सत्र में इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की.
उन्होंने सदन को बताया कि पोर्टल की शुरुआत से लेकर जनवरी 2026 तक, महाराष्ट्र को सबसे अधिक 1,024 शिकायतें प्राप्त हुईं और राज्य ने इन सभी शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
इसी तरह, गुजरात ने अपने पास आई सभी 136 शिकायतों और उत्तराखंड ने सभी 225 शिकायतों पर शत-प्रतिशत एक्शन लिया है.
मंत्री ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर दर्ज होने वाले सभी भ्रामक विज्ञापनों (MLAs), आपत्तिजनक विज्ञापनों (OAs) और दवाओं के संदिग्ध प्रतिकूल प्रभावों (ADRs) के विवरण को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के पास पहले ही भेज दिया गया है.
हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कुछ राज्यों में शिकायतों के निस्तारण की गति धीमी रही है.
उदाहरण के तौर पर, मध्य प्रदेश को देश में दूसरी सबसे अधिक 910 शिकायतें मिलीं, लेकिन वहां केवल 204 मामलों (लगभग 22%) में ही कार्रवाई की गई.
तमिलनाडु में 714 शिकायतों में से 77% पर काम हुआ, जबकि केरल में 103 शिकायतों में से केवल 50% पर ही एक्शन लिया गया.
दिलचस्प बात यह है कि विज्ञापनों के खिलाफ दर्ज कुल 9,070 शिकायतों में से बड़ा हिस्सा सरकारी संस्थानों और फार्माकोविजिलेंस केंद्रों द्वारा दर्ज कराया गया था, जबकि आम जनता की ओर से केवल 53 शिकायतें ही मिलीं.
सरकार अब राज्यों को इस पोर्टल के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है, ताकि आम नागरिक भी सुरक्षित महसूस कर सकें और गलत दावों वाले विज्ञापनों पर लगाम लगाई जा सके.