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नारायणपुर में हथियारों का जखीरा बरामद

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Hupendra Sharma

29 अग. 2025, 02:55 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

हथियार
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नारायणपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबुझमाड़ जंगल में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने हथियारों, गोला-बारूद और अन्य नक्सल-संबंधित सामग्रियों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है. पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.


पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 24 अगस्त को कासोड, कुमुरादी, मडोदा, खोडपार और गट्टाकल गांवों के जंगलों में वरिष्ठ नक्सली कैडर की मौजूदगी की सूचना पर एक संयुक्त सुरक्षा बल ने नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था. 

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इस अभियान में जिला रिजर्व गार्ड, विशेष कार्य बल (दोनों राज्य पुलिस की इकाइयाँ), और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 38वीं, 41वीं और 45वीं बटालियनों के जवान शामिल थे.


अधिकारी ने बताया कि पांच दिन तक चले इस अभियान के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई बार गोलीबारी हुई. कोहकामेटा थाना क्षेत्र के एक जंगली पहाड़ी पर माओवादियों की माड़ डिवीजन के सदस्यों के साथ मुठभेड़ हुई.


बरामद सामग्रियों में 300 से अधिक वस्तुएँ शामिल हैं, जिनमें एक लाइट मशीन गन, ट्राइची असॉल्ट राइफल, सेल्फ-लोडिंग राइफल, इंसास राइफल, एक स्टन गन, 51 मिमी मोर्टार, 9 मिमी पिस्तौल, एक देसी पिस्तौल, आठ बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, तीन .303 राइफल, चार 12-बोर राइफल, 49 मझौल-लोडिंग गन, .315 बोर राइफल के 10 कारतूस, विभिन्न आकार के 100 बीजीएल शेल, आठ देसी ग्रेनेड, एक हैंड ग्रेनेड, कॉर्डेक्स तार के दो बंडल, 141 सेफ्टी फ्यूज बंडल, जीपीएस डिवाइस, डेटोनेटर, रिमोट स्विच, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और अन्य नक्सल-संबंधित वस्तुएँ शामिल हैं.


बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया, "बस्तर क्षेत्र में पहली बार माओवादियों से ट्राइची असॉल्ट राइफल बरामद की गई है. यह हथियार क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग किया जाता है." उन्होंने कहा कि संभवतः यह हथियार पहले सुरक्षा बलों से लूटा गया होगा, और इसके स्रोत का पता लगाने के लिए डेटाबेस सत्यापन किया जा रहा है.


मुठभेड़ स्थलों पर खून के धब्बे और घसीटने के निशान मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि कई नक्सली गोलीबारी में घायल हुए होंगे.


आईजी ने कहा कि भारी बारिश और उफनती नदियों के बावजूद अबुझमाड़ में किए गए इस अभियान ने नक्सलियों पर भारी मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव डाला है. उन्होंने कहा कि यह अभियान नक्सलियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अबुझमाड़ का कोई भी हिस्सा उनके लिए सुरक्षित नहीं है, क्योंकि उनके ठिकाने तेजी से सिकुड़ रहे हैं.


वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2025 में सुरक्षा बलों के तीव्र अभियानों के कारण प्रतिबंधित माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है. उनके पास अब हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP