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विष्णुभोग धान जैविक खेती योजना में शामिल

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Hupendra Sharma

16 मई 2025, 10:47 AM 3 मिनट में पढ़ें 3

विष्णुभोग धान
विष्णुभोग धान

कोरबा | संवाददादाः धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में सुगंधित किस्म के धान की खेती की अलग पहचान है. यहां के सुगंधित चावल की मांग प्रदेश ही नहीं देश और विदेश में भी है.


लेकिन पिछले कुछ सालों से अपनी खुशबू के लिए अलग पहचान रखने वाली उत्तम किस्म की धान का रकबा घटता जा रहा है. इसमें से एक है विष्णुभोग धान. विलुप्त होती धान की इस किस्म को बचाने के लिए सरकार ने इसे राष्ट्रीय प्राकृतिक व जैविक खेती योजना में शामिल किया है.

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इससे उम्मीद जगी है कि विष्णुभोग धान का सिमटता रकबा एक बार फिर बढ़ेगा.


छत्तीसगढ़ में विष्णुभोग सहित कई किस्म के सुगंधित धान की खेती होती है, लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे इसका रकबा घटता जा रहा है. प्रदेश के अकेले कोरबा जिले में ही विष्णुभोग का रकबा 2000 हेक्टेयर था जो धीरे-धीरे घटकर महज 40 हेक्टेयर तक सिमट कर रह गया है.


उपज कम और बाजार में वाजिब दाम नहीं मिलने से किसान इससे दूरी बनाते चले गए. आम तौर पर इन दिनों उगाए जाने वाले मोटे धान की औसतन प्रति एकड़ 20 से 22 क्विंटल तक पैदावारी होती है. इसका वर्तमान सरकारी मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल है.


दूसरी ओर सुगंधित विष्णु भोग धान की पैदावार औसतन प्रति एकड़ महज 14 से 15 क्विंटल है. बाजार में कीमत भी सही नहीं मिलती. जिस वजह से इसका रकबा लगातार सिमटता गया. अब तो यह किस्म विलुप्त होने की कगार पर आ गई.


विष्णुभोग जैसे सुगंधित धान की खुशबू को बरकरार रखने के लिए सरकार इसे जैविक खेती की ओर मोड़ रही है.


जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अब इस किस्म को राष्ट्रीय प्राकृतिक व जैविक खेती योजना में शामिल किया है. अब विष्णुभोग धान की जैविक तरीके से पैदावार की जाएगी.


500 किसानों का चयन 

राज्य सरकार इसी खरीफ सीजन में 500 किसानों का चयन करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए किसानों का चयन भी किया जा रहा है.


चयनित किसानों को 120 रुपए प्रति किलो वाला बीज उपचारित कर महज 80 रुपए में दिया जाएगा.


यही नहीं किसानों द्वारा उपजाए धान को ही बीज के रूप में ऊंचे मूल्य पर खरीदा जाएगा. एक एकड़ में औसतन 25 किलो बीज लगता है.


खेती से पूर्व किसानों को बीज उपलब्ध कराने के अलावा जैविक खाद उत्पादन से लेकर बोआई व फसल की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.

 

किसानों को किया जाएगा प्रशिक्षित

सरकारी योजना के तहत जैविक रूप से उत्पादित विष्णु भोग किस्म के चावल को किसान खुले बाजार में बेच सकें. इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाएगा.


मोटा चावल की कीमत 42 से 45 रुपए प्रति किलो है, वहीं विष्णु भोग की कीमत 90 रुपए प्रति किलो है. इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा. 


विष्णुभोग चावल में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होता है. यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं.


इसका सुगंधित और स्वादिष्ट दाना भोजन को विशेष बनाता है. यह चावल पचाने में आसान होता है. चावल जितना पुराना होता है उसकी गुणवत्ता भी बढ़ती जाती है. 


रासायनिक खाद से छुटकारा 

किसान प्रति एकड़ धान की अधिक से अधिक उपज पाने के लिए रासायनिक खाद की उपयोगिता बढ़ा दी है.


किसानों ने परंपरागत धान के बजाए रासायनिक खाद और कीटनाशक पर निर्भर ऐसी किस्म को उगाना शुरू कर दिया, जिससे अधिक से अधिक उपज हो.


जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद का उपयोग मिट्टी के लिए हानिकारक होता जा रहा है. पहले के किसान उपज बढ़ाने के लिए खेतों में फसल परिवर्तन करते थे.


अब धान के दाम समर्थन मूल्य में अधिक मिलने से किसान खरीफ के साथ रबी में भी इसकी खेती करने लगे हैं.


सुगंधित धान की खेती को बढ़ावा मिलने से रासायनिक खाद की उपयोगिता में कमी आएगी. 

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP