सोम, 19 अक्टू. 2026

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साय सरकार को सुप्रीम चेतावनीः दो माह में भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण का हो गठन

छत्तीसगढ़ सरकार को भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण गठन करने सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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20 जुल. 2025, 09:05 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट का आदेश

रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के किसान बाबूलाल द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण के गठन के लिए दो महीने का समय दिया है.


सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर प्राधिकरण के गठन का निर्देश देने के साथ ही समय सीमा के भीतर आदेश का पालन न होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को होगी, तब तक राज्य सरकार को प्राधिकरण का गठन करना होगा. 

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किसान बाबूलाल ने अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के तहत प्राधिकरण का गठन नहीं हुआ है. इसकी वजह से भूस्वामियों को मुआवजे, ब्याज और अन्य दावों के निराकरण के लिए भटकना पड़ता है.


अधिनियम के अनुच्छेद 5(a) के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद दावों और आपत्तियों का निराकरण एक वर्ष के भीतर करना अनिवार्य है. प्राधिकरण के अभाव में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही, जिससे किसानों को परेशानियों के साथ ही नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.


भूस्वामियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी

इससे पहले, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मुद्दे से संबंधित एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया था. इसके बाद बाबूलाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बागची की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की और इसे किसानों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना.


छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्राधिकरण गठन में देरी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण का गठन न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है, बल्कि यह किसानों और भूस्वामियों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी जरूरी है.


भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 (LARR Act) भारत में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए लागू किया गया था.


इसके अंतर्गत भूस्वामियों को उनकी जमीन के मूल्य के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाना. प्रभावित लोगों को पुनर्वास और पुनर्स्थापन की सुविधा प्रदान करना.


अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और प्रभावित पक्षों को दावे व आपत्तियां दर्ज करने का अधिकार प्रदान किया गया है.


प्राधिकरण का गठन नहीं होने से छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण से संबंधित कई मामले लंबित हैं. इससे न केवल किसानों को मुआवजे में देरी हो रही है, बल्कि उनकी आपत्तियों का समाधान भी नहीं हो पा रहा है. 

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP