शुक्र, 23 अक्टू. 2026

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मैं भी मांझी की बेटी हूँ, विकास के साथ सांस्कृतिक पहचान सहेजना जरूरी- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

"मैं भी मांझी की बेटी हूँ..."— ऐतिहासिक मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक न्याय व्यवस्था और सामूहिकता की भावना को याद करते हुए शिक्षा एवं विकास के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया.

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23 अक्टू. 2026, 06:48 PM 3 मिनट में पढ़ें 21

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

जगदलपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के समापन अवसर पर आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिरकत की. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अनूठी न्याय प्रणाली और एकजुट सामाजिक ताने-बाने की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि समय बदलने के साथ कानून और नीतियां बदलती हैं, लेकिन आदिवासी समाज ने अपने अलिखित संविधान और परंपराओं को पीढ़ियों से जीवंत रखा है, जो सुशासन और सामूहिकता का एक अनूठा उदाहरण है.

अपनी जड़ों से गहरा जुड़ाव और पारंपरिक व्यवस्था की सराहना

संबोधन के दौरान राष्ट्रपति अपने भावुक संस्मरणों को साझा करने से खुद को रोक नहीं सकीं. उन्होंने उपस्थित जनसमूह से कहा कि वे स्वयं आदिवासी संस्कृति से आती हैं और एक मांझी की बेटी हैं. उनके पिता और दादा भी गांव के प्रमुख यानी मांझी हुआ करते थे. राष्ट्रपति ने कहा कि आज भले ही वे सदस्य साथ नहीं हैं, लेकिन अपनी परंपराओं और समाज से उनका जुड़ाव हमेशा गहरा रहेगा. उन्होंने बताया कि राजाओं के शासन से लेकर अंग्रेजों और आज के लोकतांत्रिक भारत तक कई व्यवस्थाएं बदलीं, लेकिन आदिवासी समाज ने बिना किसी लिखी हुई किताब के अपनी समृद्ध जीवनशैली को बचाकर रखा है.

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पारंपरिक न्याय प्रणाली और आपसी संवाद पर जोर

राष्ट्रपति मुर्मु ने आदिवासी समाज की पारंपरिक न्याय व्यवस्था, विशेषकर 'पीड़ परगना' और 'देश परगना' जैसी संस्थाओं के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आधुनिक अदालती प्रक्रियाओं में अक्सर समय और धन दोनों नष्ट होते हैं, जबकि गांवों में मांझी और बुजुर्ग आपसी सहमति और संवाद से विवादों को सुलझा लेते हैं. उन्होंने समाज से आग्रह किया कि जहां संभव हो और कानून के दायरे में हो, वहां पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और आपसी बातचीत के जरिए ही छोटे-मोटे विवाद निपटाए जाने चाहिए ताकि समाज में सुख और शांति बनी रहे.

शिक्षा से प्रगति और संस्कृति के संरक्षण का आह्वान

बदलते दौर में आदिवासी युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने शिक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के नए अवसर दें. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिकता और विकास को अपनाने का अर्थ अपनी पहचान को छोड़ना नहीं है. विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए नई सोच के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना और भावी पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराना अत्यंत आवश्यक है.

मुरिया दरबार की ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखने का संदेश

संबोधन के अंत में उन्होंने मुरिया दरबार जैसी ऐतिहासिक व्यवस्थाओं को निरंतर बनाए रखने का आह्वान किया. उन्होंने बस्तर के लोगों द्वारा मिले आत्मीय स्वागत के लिए आभार जताया. कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए. इस गरिमामयी समारोह में बस्तर दशहरा समिति के पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में पारंपरिक मांझी-चालकी व गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP