एक माह बाद भी उन्हारी फसल खरीदी केन्द्रों में बोहनी नहीं
छत्तीसगढ़ एक माह बाद भी उन्हारी फसल खरीदी केन्द्रों में बोहनी नहीं
बेमेतरा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के किसान समर्थन मूल्य पर उन्हारी फसल बेचने में रूचि नहीं ले रहे हैं. खरीदी शुरू हुए एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी खरीदी केन्द्रों में अभी तक एक भी किसान अपनी उपज बेचने नहीं पहुंचा है.
जबकि खरीदी को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिले में 9 खरीदी केन्द्र खोले गए हैं. सुबह से शाम तक इन केन्द्रों में केवल किसानों का इंतजार किया जा रहा है.
इसके बाद भी खरीदी की बोहनी नहीं हो रही है. जबकि बेमेतरा को उन्हारी जिला के तौर पर पहचाना जाता है.
राज्य सरकार ने धान खरीदी की तर्ज पर रबी फसल सीजन में चिह्नित किए गए 9 तरह के दलहन-तिलहन फसलों की खरीदी 1 मार्च से शुरू कर दी है.
बेमेतरा जिले में उन्हारी फसल के लिए प्राइम सपोर्ट स्कीम से अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन, चना, मसूर व सरसो फसल की खरीदी के लिए सरकार ने पहल की है.
इस योजना के सामने आते ही जिले के 2180 किसानों ने कुल 2 लाख 53 हजार 828 हेक्टेयर रकबे की फसल बेचने के लिए पंजीयन कराया है.
9 खरीदी केन्द्र बनाए गए
किसानों को फसल बेचने में ज्यादा परेशानी ना हो इसलिए बेमेतरा, साजा, बेरला और नवागढ़ ब्लॉक में कुल 9 खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं.
प्राथमिक सेवा सहकारी समिति केन्द्र दाढ़ी के साथ खंडसरा, नवागढ़, थानखम्हरिया, ठेलका, साजा, परपोड़ी, देवरबीजा और बेरला में किसानों को फसल बेचना था.
अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन तथा सरसो का उपार्जन 15 फरवरी से 15 मार्च तक किया जाना है.
इसी प्रकार चना और मसूर का उपार्जन 1 मार्च से 30 मई तक किया जाना है. इस आदेश के बाद से जिले के चिह्नित 9 खरीदी केन्द्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया गया.
इसके लिए बैनर पोस्टर भी लगाए गए थे. इन केन्द्रों के अधिकारी-कर्मचारी फसल बेचने वाले किसानों का केन्द्र आने के लिए इंतजार कर रहे हैं.
लेकिन अभी तक एक भी किसान उपज बेचने नहीं पहुंचा है. अभी तक बोहनी तक नहीं होना भी चिन्ता का विषय है.
बाजार भाव बढ़ने का इंतजार
उपसंचालक कृषि मोरध्वज डडसेना का कहना है कि वर्तमान बाजार भाव के मुकाबले सहकारी समितियों में किसानों को अधिक मूल्य दिया जा रहा है. इसके बाद भी किसान बाजार का भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं.
बाजार में चना इन दिनों 5 हजार, अरहर 7 हजार, मूंग व उड़द 6 हजार, सरसो 4 हजार क्विंटल के दर पर खरीदा जा रहा है.
जबकि सरकारी समितियों में चना 5 हजार 440 रुपए प्रति क्विंटल, मूंग व उड़द 6 हजार और सरसो 5 हजार रुपए प्रतिक्विंटल खरीदा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि बाजार का भाव बढ़ने के बाद ही किसान उपज बेचेंगे. बाजार में भाव नहीं मिलने की स्थिति में ही किसान केन्द्रों में आकर उपज बेचेंगे.
मात्रा और दर निर्धारित
सरकार द्वारा किसानों की सुविधा के लिए मात्रा और दर का भी निर्धारण किया गया है.
अरहर, मूंग, उड़द को तीन-तीन क्विंटल प्रति एकड़ व मूंगफली को 7 क्विंटल प्रति एकड़, सोयाबीन 5 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित किया गया है.
इसी प्रकार चना 6 क्विंटल प्रति एकड़, मसूर 2 क्विंटल प्रति एकड़, सरसों 5 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से मात्रा तय की गई है.
इसमें अरहर 7550 रुपए प्रति क्विंटल, मूंग 8682 रुपए प्रति क्विंटल, उड़द 7400, फूंगफली 6783, सोयाबीन 4892 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है.
जिले में इस बार 50620 हेक्टेयर में चना और 34700 हेक्टेयर में मसूर लगाया गया है.
इसी प्रकार 83 हजार हेक्टेयर में दलहन और 1202 हेक्टेयर रकबा में तिलहन का फसल लगाया गया है.