खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही डीएपी की किल्लत
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में प्री-मानसून के दस्तक देते ही किसानों ने खरीफ सीजन की फसलों को लेकर तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं. लेकिन सरकार की तैयारियां अधूरी नजर आ रही हैं.
सीजन शुरू होने से पहले ही किसानों को डीएपी खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है.
वर्तमान हालात को देखते हुए अगर कृषि विभाग द्वारा इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर किसान तो परेशान होंगे, बल्कि उत्पादन पर भी इसका असर पड़ेगा.
प्रदेश के ज्यादातर जिलों की सोसाइटियों में डीएपी खाद की कमी की शिकायतें मिल रही हैं. जिसके चलते किसानों को सोसाइटियों से बैरंग लौटना पड़ा रहा है.
जांजगीर-चांपा में तो डीएपी की उपलब्धता शून्य बताई जा रही है. वहीं दुर्ग जिले में डीएपी के लक्ष्य को घटा कर काफी कम कर दिया गया है.
इसी तरह कई जिलों में स्वर्णा और महामाया धान के बीज की कमी की शिकायतें आ रही हैं.
किसान धान बुआई के लिए अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. जैसे ही अच्छी बारिश होगी कृषि कार्यों में तेजी आएगी.
किसान बुआई और नर्सरी लगाने का काम शुरू करेंगे. अभी किसान खेतों की सफाई करने में जुटे हुए हैं.
कृषि विभाग एक ओर किसानों को सोसायटियों से शीघ्र ही खाद और बीज के उठाव के लिए दिशा-निर्देश जारी कर रहा है.
लेकिन सोसायटी जाने से पता चलता है कि सभी प्रकार के खाद वहां उपलब्ध ही नहीं हैं. खासकर डीएपी खाद की काफी किल्लत है.
डीएपी की कमी को देखते हुए कृषि विभाग अभी से किसानों को एसएसपी और एनपीके को इसके विकल्प के रूप में उपयोग करने की सलाह दे रहा है.
जांजगीर-चांपा जिले में डीएपी की उपलब्धता पूरी तरह शून्य बताई जा रही है. इसे लेकर किसान परेशान हैं.
यहां के किसानों का कहना है कि सोसायटियों में जबरदस्ती एनपीके खाद को डीएपी का विकल्प बता कर थमाया जा रहा है.
मना करने पर किसान और समिति प्रबंधकों के बीच विवाद कि स्थिति निर्मित हो रही है.
दुर्ग जिले में लक्ष्य ही घटा दिया
दुर्ग जिले में तो डीएपी खाद की किल्लत को देखते हुए इसके लक्ष्य को ही घटाकर 5,267 मीट्रिक टन कर दिया गया है. जबकि पिछले साल 14,915 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण हुआ था.
इसी प्रकार सक्ती जिले में 7,300 मीट्रिक टन डीएपी भंडारण का लक्ष्य रखा गया था. जबकि इसके विपरीत मात्रा 355 एमटी ही भंडारण किया गया है.
राजनांदगांव जिले में इस वर्ष 64,640 मीट्रिक टन खाद भंडारण का लक्ष्य है. जिसमें से अब तक 13,211 मीट्रिक टन का ही भंडारण हुआ है. जिसमें डीएपी 11 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध मात्र 975.3 मीट्रिक टन ही आपूर्ति अब तक गई है.
महासमुंद जिले में तो डीएपी के साथ ही पोटाश का संकट है. जिले में करीब 5 हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरुरत पड़ती है. लेकिन यहां अभी तक 1679 मीट्रिक टन का ही भंडारण किया गया है.
महासमुंद जिले में पूरे सीजन के दौरान 66 हजार एमटी सभी खाद की जरूरत पड़ती है. जबकि अभी तक 16 हजार मीट्रिक टन का भंडारण हुआ है.
किसान लगा रहे हैं सोसायटियों का चक्कर
सरगुजा जिले में तो डीएपी खाद की मांग 7 हजार मीट्रिक टन है. जबकि यहां 1031 मीट्रिक टन भंडारण किया गया है.
रायगढ़ जिले में डीएपी खाद अभी तक मात्र 1,722 मीट्रिक टन आपूर्ति की गई है. जबकि यहां लक्ष्य 8,600 मीट्रिक टन का है.
बताया जा रहा है कि बालोद और बेमेतरा जिलों में भी खाद की किल्लत है. यहां के किसान भी सोसायटियों का चक्कर लगा रहे हैं.
बलौदाबाजार जिले में भी अभी से खाद संकट गहराता जा रहा है. इसके अलावा यहां के कुछ समितियों में बीज उपलब्ध नहीं है.