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फसल बीमा में किसानों से अधिक कंपनियों को फायदा

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Hupendra Sharma

12 मई 2025, 11:16 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

फसल बीमा
फसल बीमा

इंदौर | संवाददाताः प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाओं से किसानों को कम और बीमा कंपनियों को ज्यादा फायदा हो रहा है. बीमा कंपनी एक सीजन में ही करोड़ों कमा कर मालामाल हो रहे हैं.


हर साल लाखों किसान अपनी फसल के लिए बीमा प्रीमियम भरते हैं, लेकिन मुआवजा के नाम पर कुछ किसानों को ही भुगतान किया जाता है. वह भी फसल के खराब होने के अनुपात से काफी कम. इससे किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. 


खरीफ सीजन 2023-24 में तो मध्यप्रदेश के अकेले इंदौर जिले में ही 2 लाख 14 हजार 203 किसानों ने बीमा पॉलिसी ली थी. जिसमें से मात्र 9 हजार 628 किसानों को ही बीमा का लाभ मिल पाया था.


बाकी किसान बीमा राशि का इंतजार करते रहे पर उन्हें अभी तक कुछ नहीं मिला है. जबकि खरीफ का दूसरा सीजन अब शुरू होने वाला है. 


जबकि जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाली थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट यानी सीएसई का कहना है कि पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसी में बीमा दावा पाने के लिए घटना जरूरी नहीं है. इसमें सीमा से अधिक बारिश या अन्य विपदा के आंकलन पर क्लैम स्वीकृत होता है.


कंपनी का कहना है कि इसमें पूर्व निर्धारित मानकों जैसे तय सीमा से अधिक बारिश, सूखा या अन्य जलवायु संकेतकों के आधार पर स्वचालित रूप से दावा स्वीकृत होता है.


बारिश से सोयाबीन फसल को नुकसान 

पिछले खरीफ सीजन में जलवायु परिवर्तन से बिगड़ते वातावरण के कारण फसलों पर विपरीत असर पड़ा था.


किसानों ने तय समय पर बारिश होते ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी. बीच उगकर पौधे के रूप में जमीन से बाहर निकल आए थे.


इसके बाद काफी दिनों तक बारिश नहीं हुई. जिस वजह से पौधों पर इल्ली लग गई. इसके बाद तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश हुई. जिसका पौधों पर विपरीत असर पड़ा.


पहले इल्ली फिर तेज हवा और तूफान से कारण खेतों में फसल को काफी नुकसान हुआ.


किसानों की शिकायत के बाद कृषि विभाग ने फसलों का आंकलन कराया. प्रधानमंत्री फसल बीमा पॉलिसी के तहत बीमा करने वाली कंपनी को कुछ क्षेत्रों में ही फसल का नुकसान नजर आया.


कंपनी ने खानापूर्ति कर अपना काम तो कर लिया लेकिन इसका खामियाजा तो किसानों को भुगतना पड़ा. कंपनी की गलत सर्वे रिपोर्ट के कारण 2 लाख 14 हजार 203 किसानों में केवल 9 हजार 628 किसानों को बीमा क्लैम मिल सका. 


बीमा कंपनी एक सीजन में मालामाल

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इंदौर जिले में खरीफ सीजन 2023-24 में 2014205 किसानों ने बीमा पॉलिसी ली थी.


इन सभी किसानों 140851.47 हेक्टेयर पर लगी फसल का बीमा करवाया था.


बीमा कंपनी ने किसानों से इसकी प्रीमियम 12 करोड़ 67 लाख 62 हजार 418 रुपए वसूल की थी. वहीं सरकार को 17 करोड़ 77 लाख 81 हजार 947 रुपए प्रीमियम चुकानी पड़ी.


बारिश और इल्ली से लगभग सभी किसानों को नुकसान हुआ. लेकिन फसल नुकसान का आंकलन सीमित क्षेत्र में ही दर्शाया गया.


जिस वजह से कुल 9848 किसानों का केवल 2 करोड़ 26 लाख 17 हजार 610 रुपए बीमा क्लैम पास हुआ. 


साल 2023-24 खरीफ फसल में 30 करोड़ 45 लाख 44 हजार 365 रुपए प्रीमियम के एवज में 2 करोड़ 26 लाख 17 हजार 610 रुपए का क्लैम पास हुआ.

इस प्रकार एक खरीफ सीजन में ही बीमा कंपनी को 28 करोड़ 19 लाख 26 हजार 755 रुपए का लाभ हुआ. 


प्रधानमंत्री फसल बीमा में ये शामिल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खड़ी फसलों के नुकसान का आंकलन किया जाता है.


जैसे खड़ी फसल में प्राकृतिक आग, बिजली, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, आंधी, बवंडर में फसल नष्ट होने का मौका मुआयना होता है.


इसके अलावा, बाढ़, भूस्खलन, सूखे, कीट रोग आदि भी शामिल हैं. इसके आधार पर क्लैम पास होता है.


वहीं फसल कटाई के बाद भी कुछ नुकसान शामिल है. लेकिन इसकी अवधि 14 दिनों के अंदर तय है. इसके बाद का नुकसान शामिल नहीं किया जाता.


पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसी दोनों के मापदंड अलग-अलग हैं.


पैरामीट्रिक बीमा में नुकसान की भरपाई किसी घटना के घटने पर नहीं बल्कि एक तय सीमा को पार करने पर होती है.


इसे इस प्रकार से समझ सकते हैं, जैसे बारिश के मामले में बारिश की मात्रा. निर्धारित आंकड़ा से अधिक होना.


इसी तरह चक्रवात के मामले में हवा की गति, हीटवेव के मामले में तापमान की सीमा आदि.


यह सीमा प्राकृतिक आपदा मॉडल और जोखिम मूल्यांकन से तय होती है.


हालांकि पैरामीट्रिक बीमा को लेकर वर्तमान में 3 से 4 तरह के प्रयोग चल रहे हैं.


राज्य सरकार और कुछ जमीनी संगठन पैरामीट्रिक बीमा में पायलट प्रयोग के जरिए काम कर रहे हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP