सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

छत्तीसगढ़ का बेमेतरा भू-जल दोहन में सबसे आगे

C

CG Khabar

29 मार्च 2025, 09:29 AM 3 मिनट में पढ़ें 3

बेमेतरा भू-जल दोहन में आगे
बेमेतरा भू-जल दोहन में आगे

रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ का बेमेतरा जिला भू-जल दोहन के मामले में सबसे आगे पहुंच गया है. जिससे जिले में जल संकट की स्थिति बन रही है. खासकर यहां बोरवेल के माध्यम से पानी निकालने से भूल-जल स्तर में काफी कमी आई है. इसी तरह बालोद, धमतरी और दुर्ग जिले में भू-जल का दोहन अधिक हो रहा है. 


जबकि प्रदेश के सुकमा जिले में भू-जल दोहन का प्रतिशत सबसे कम है. प्रदेश के चार जिलों बालोद, बेमेतरा, धमतरी और दुर्ग में 70 प्रतिशत से अधिक भू-जल दोहन किया जा रहा है.

विज्ञापन


वहीं प्रदेश के 146 ब्लॉकों में बालोद जिले का गुरूर ब्लॉक भू-जल दोहन के मामले में सबसे आगे है. उसके बाद धरसीवां ब्लॉक का नंबर आ रहा है. 


दोनों ब्लॉकों में वर्तमान में जलसंकट छाया हुआ है. इन दोनों के नक्शेकदम में चार और ब्लॉक आगे बढ़ रहे हैं. 


इनमें बेरला, नवागढ़, बसना और पिथौरा शामिल हैं. हालांकि प्रदेश के 146 में से 116 ब्लॉक फिलहाल जलसंकट से दूर हैं. 


भूजल विदों का कहना है कि राज्य में पहले 36 प्रतिशत भूजल का इस्तेमाल होता था. लेकिन पिछले कुछ सालों से इसमें काफी वृद्धि हुई है. 


अब यह आंकड़ा बढ़कर 49 फीसदी हो गया है. यदि इसमें सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जलसंकट की स्थिति काफी भयावह होगी. 

 

क्या है सेमी और क्रिटिकल की श्रेणी 

भूजल विदों ने भू-जल दोहन के संदर्भ में बताया कि सेमी-क्रिटिकल का मतलब है कि किसी क्षेत्र में भूजल का दोहन 70 से 90 प्रतिशत तक हो रहा है. 


जबकि क्रिटिकल का अर्थ है कि दोहन 90 से 100 प्रतिशत तक हो रहा है. जहां भूजल का 100 फीसदी या इससे ज्यादा इस्तेमाल होता है, उस विकासखंड को अतिदोहन की श्रेणी में रखा जाता है. जबकि 70 फीसदी से कम भूजल स्त्रोत का दोहन करने वाले ब्लॉक को सुरक्षित श्रेणी में रखा जाता है.


प्रदेश के 146 में से 116 ब्लॉक फिलहाल जलसंकट से दूर हैं. गुरूर ब्लॉक पहले अतिदोहन की श्रेणी में था. जिसमें कुछ सुधार हुआ है. 


इसके बाद भी क्रिटिकल की श्रेणी में है. चिंता की बात है कि प्रदेश के चार नए ब्लॉक सेमी क्रिटिकल स्थिति में आ चुके हैं.

 

धरसीवां ब्लॉक क्रिटिकल श्रेणी में

केन्द्रीय भूजल बोर्ड और राज्य के भूजल विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक भू-जल का दोहन 8 फीसदी बढ़ा है. धरसीवां ब्लॉक सेमी क्रिटिकल से क्रिटिकल की श्रेणी में पहुंच चुका है. 


वहीं प्रदेश के बेरला, नवागढ़, बसना, पिथौरा, बरमकेला, धमतरी, बेमेतरा, साजा, बैथा, तखतपुर, कुरूद, धमधा, पंडरिया, डोंगरगांव, राजनांदगांव, बालोद, नवागढ़ और पुसोर सेमी क्रिटिकल में है. 


प्रदेश के 146 ब्लॉकों में से 38 ब्लॉकों में भू-जल दोहन 30 प्रतिशत से कम है. जबकि 29 ब्लॉकों में 30 से 50 प्रतिशत के बीच भू-जल का दोहन किया जा रहा है. 


वहीं 49 ब्लॉकों में 50 से 70 प्रतिशत के बीच है. प्रदेश में 30 ब्लॉक ऐसे हैं जहां 70 प्रतिशत से अधिक भू-जल का दोहन किया जा रहा है. 


मूल्यांकन इकाइयों का वर्गीकरण-146 ब्लॉकों में से 6 इकाइयों को महत्वपूर्ण, 24 इकाइयों को अर्ध महत्वपूर्ण और 116 इकाइयों को सुरक्षित ब्लॉकों की श्रेणी रखा गया है. 


वहीं प्रदेश के बालोद, बेमेतरा, बिलासपुर और धमतरी में क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल ब्लॉक बांटे गए हैं. 

 

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP