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घोर नक्सल गढ़ में 20 साल बाद बस सेवा शुरू

छत्तीसगढ़ घोर नक्सल गढ़ में 20 साल बाद बस सेवा शुरू

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03 मार्च 2025, 09:22 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

नक्सलगढ़
नक्सलगढ़

बीजापुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का एक ऐसा इलाका, जहां कभी बमुश्किल दुपहिया वाहन नजर आते थे. अब उस इलाके में करीब 20 साल बाद यात्री बस सेवा शुरू कर दी गई है. 


दरअसल यह इलाका बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर बसे पामेड़ गांव समेत उस इलाके की 8 से 10 पंचायतों का है.

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यहां पिछले 6 महीनों के भीतर पुलिस कैम्प खोलकर सड़क और गांव तक मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया है. 


यात्री बस सेवा यहां के ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है. 


यात्री बस संचालन के चलते अब इस क्षेत्र के ग्रामीणों को तेलंगाना से होते हुए अपने गांव जाने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी बल्कि अब बीजापुर से सीधे 100 किमी का सफर तय कर पामेड़ पहुंच रहें हैं.

 

20 साल बाद ग्रामीणों को मिली परिवहन की सुविधा  
दरअसल पामेड़ इलाके में कभी सड़क नहीं बनी थी ऐसा नहीं है, बल्कि 20 साल पहले भी सड़क बनी थी. 


लेकिन वाहनों का संचालन नहीं होता था. उसके बाद धीरे-धीरे इस इलाके में नक्सलियों ने अपनी पैठ जमाई  और पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया.


जिसके चलते इस इलाके को नक्सलियों की राजधानी कहा जाने लगा. 


धीरे-धीरे सुरक्षाबलों के बढ़ते प्रभाव व सिमटते नक्सलियों के चलते यहां अब सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ गई है. 


बीजापुर से सुबह पामेड़ के लिए जाने वाली बस आवापल्ली, बासागुड़ा, तररेम, चिन्नागेल्लूर, गुंडेम कोंडापल्ली, जीडपल्ली करवगट्टा और धर्माराम होते हुए पामेड़ पहुंचती है.


जिसमें अब धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या बढ़ने लगी है. जवानों की सुरक्षा के साये में सड़कों का विस्तार किया जा रहा है और लोगों को विकास कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

 

ग्रामीणों को मिल रही है यात्री बस की सेवा 
बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा ने बताया कि बीजापुर से पामेड़ जाने  चेरला के रास्ते होते हुए करीब 220 किलोमीटर का सफर 5 से 6 घंटे में तय कर ग्रामीणों को जाना पड़ता था. 


अब बीजापुर से आवापल्ली, बासागुड़ा होते हुए 100 किलोमीटर का सफर तय कर पामेड़ पहुंचा जा सकता है. 


पहले तर्रेम तक सड़क बन चुकी थी, जिसके बाद तर्रेम से पामेड़ तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया गया. 


हालांकि अभी सड़क पूरी तरह से नहीं बनी है, लेकिन इस सड़क में यात्री बस सेवा शुरू कर दी गई है. 


जिससे पामेड़ के साथ-साथ उसके आसपास 8 से 10 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को इसका लाभ मिल रहा है.

 

वेतन से लेकर अखबार हेलीकॉप्टर से भेजा जाता था

 

दरअसल पामेड़ वह इलाका है जहां पदस्थ जवानों के लिए कभी वेतन से लेकर अखबार तक हेलीकॉप्टर से भेजा जाता था. 


अब सड़क बनने और बस सेवा के शुरू हो जाने से जवानों के लिए भी सफर आसान हो गया है. 


जवानों और ग्रामीणों के लिए अच्छी बात यह है कि इस इलाके में मोबाइल कनेक्टिविटी का भी विस्तार हुआ है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP