आप प्रदेश महासचिव जसबीर सिंह चावला का इस्तीफा
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ आम आदमी पार्टी के प्रदेश महासचिव जसबीर सिंह चावला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा आप के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संदीप पाठक को भेजा है.
उन्होंने इस्तीफे के लिए 10 बड़े कारण गिनाए हैं. जिसमें पार्टी में अव्यवस्था, कार्यकर्ताओं का सम्मान खत्म, जवाबदेही की कमी, जमीनी स्तर पर कोई गतिविधि नहीं, दिल्ली पर अत्यधिक निर्भरता सहित कई कारण गिनाए हैं.
जसबीर सिंह चावला ने पत्र में लिखा है कि पार्टी छोड़ने के 100 कारण हैं, लेकिन यहां सिर्फ 10 कारण ही बता रहा हूं.
उन्होंने कहा है कि पार्टी को 14 साल देने के बाद आज त्यागपत्र देने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं. मेरे जाने के बाद, जो पदाधिकारी और कार्यकर्ता पार्टी में हैं और आने वाले दिनों में पार्टी ज्वाइन करेंगे, उनके साथ वह सब न हो जो मेरे और मेरे जैसे कई पदाधिकारियों के साथ हुआ है.
चावला ने कहा कि 16 अगस्त 2011 से 14 वर्ष पार्टी को दिए. शिक्षा और रोजगार, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर किए जा रहे काम से सहमत था, लेकिन छत्तीसगढ़ में इनमें से किसी भी क्षेत्र में जमीनी स्तर पर अब कोई गतिविधि नहीं दिख रही.
उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य को मिले फंड के बावजूद अब तक पार्टी का बैंक खाता नहीं खोला गया. नतीजा यह हुआ कि प्रदेश कार्यालय का तीन महीने से किराया बकाया रहा और आखिरकार मकान मालिक ने ताला जड़ दिया. आज कार्यालय बंद पड़ा है.
उन्होंने कहा कि अब पार्टी में कार्यकर्ताओं का सम्मान खत्म हो गया है. चाटुकारिता हावी हो गई है. समय पर कार्रवाई न करने पर प्रदेश अध्यक्ष हुक्मरान हो गए हैं. वहीं अरविंद केजरीवाल अब न तो कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और न ही पदाधिकारियों से संवाद करते हैं. यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष से भी मुलाकात नहीं होती, तो आम कार्यकर्ता और बाकी पदाधिकारियों की तो बात ही छोड़ दीजिए.
जसबीर सिंह चावला का कहना है कि छत्तीसगढ के लिए उनके पास कोई ठोस विजन भी नहीं है. विधानसभा चुनाव खत्म हुए करीब 24 महीने हो गए. इसके बाद भी प्रदेश के लिए कोई प्लान नहीं है. पार्टी को चलाने के लिए, फंड रेसिंग के लिए कोई प्लान नहीं होना भी एक बहुत बड़ी चुनौती है. पार्टी की प्रगति में यह एक बड़ी रुकावट है.
उन्होंने कहा है कि पार्टी की कोई स्पष्ट विचारधारा नहीं दिखती. आप आदिवासियों के साथ तो नहीं थे, अब अल्प संख्यक के साथ भी नहीं हैं. यहां तक जरुरतमंद लोगों के साथ भी खड़े नहीं होते. उन्होंने कहा है कि अब पार्टी अपने संविधान अनुसार कार्य नहीं कर रही है. छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं को अंधेरे में रखा जा रहा है. नियुक्ति की जगह घोषणा करके पदों को रेवड़ी की तरह बांटा जा रहा है.