छत्तीसगढ़ में कोरोना के 4 नये मरीज मिले, पुराने वैक्सिन का क्या है असर ?
छत्तीसगढ़ में कोरोना के 4 नये मरीज मिले
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं. राजधानी रायपुर में कोरोना के चार नये मामले सामने आए हैं.
अब तक प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 11 हो गई है. जिसमें सबसे ज्यादा रायपुर में 7 मरीज हैं. वहीं दुर्ग में एक मरीज की पुष्टि हुई है.
नए मरीजों की अब तक कोई ट्रैवल हिस्ट्री सामने नहीं आई. इनमें से एक को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है.
कोरोना को लेकर प्रदेश में अलर्ट जारी किया है. प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल मेकाहारा अस्पताल में ओपीडी सेवा भी शुरू हो गई है.
तैयारियों को लेकर अस्पताल में बैठक हुई. मरीजों के इलाज, दवा, बेड, ऑक्सीजन, पीपीई किट और सैंपल जांच की सुविधा समेत अन्य विषयों पर चर्चा हुई.
विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम भी गठित की गई है.
भारत में 4026 मामले आए सामने
पूरे देश में कोरोना वायरस के मामले फिर से तेजी से बढ़ रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 4026 तक पहुंच गई है.
केरल में सबसे ज्यादा 1416 कोरोना सक्रिय मरीज हैं. जो देश में सर्वाधिक है. इसके बाद महाराष्ट्र में 494 मामले सामने आए हैं.
जबकि कोरोना से अब तक 38 लोगों की मौतें हो चुकी हैं. वहीं अब तक देशभर में 2700 मरीज ठीक भी हुए हैं.
पिछले 24 घंटों की बात करें तो 200 से अधिक नए मामले सामने आए हैं. जबकि 5 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है.
केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मौतें
कोरोना वायरस से जिन पांच मरीजों की मौत हुई है वे केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हैं.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, कोरोना से केरल में 80 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत की सूचना मिली है, जो गंभीर निमोनिया और तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम के साथ-साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोरोनरी धमनी रोग से पीड़ित था.
तमिलनाडु में टाइप 2 मधुमेह और पार्किंसंस रोग से पीड़ित 69 वर्षीय महिला ने वायरस के कारण दम तोड़ दिया.
पश्चिम बंगाल में एक 43 वर्षीय महिला की मौत की सूचना मिली, जो तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम, सेप्टिक शॉक और एक्यूट किडनी इंजरी से पीड़ित थी.
महाराष्ट्र में भी सोमवार को एक 70 साल और एक 73 साल की महिला की जान चली गई.
वायरस मौसमी फ्लू के समान
कोरोना वायरस के नए मामलों के बढ़ने की वजह NB.1.8.1 सब-वेरिएंट को माना जा रहा है, जोकि कोविड-19 का ओमिक्रॉन का वेरिएंट है.
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने पुष्टि की है कि नया स्ट्रेन तेजी से फैलता है और अत्यधिक परिवर्तनशील है, लेकिन यह हल्की बीमारी का कारण बनता है.
सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, थकान, सिरदर्द, शरीर में दर्द, नाक बहना और भूख न लगना शामिल हैं.
ये वायरस मौसमी फ्लू के समान ही है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से मास्क पहनने, भीड़ से बचने और लक्षण दिखने पर टेस्ट कराने की सलाह दी है.
असर करेगी पुरानी वैक्सिन ?
कोरोना वायरस के फैलते मामलों के बीच लोगों में यह सामान्य सवाल है कि जिन लोगों ने कोरोना का वैक्सिन लगवा रखा है, उन पर कोरोना के नए वैरिएंट का क्या असर है.
क्या कोरोना वैक्सीन ले चुके लोग वायरस के नये वैरिएंट से सुरक्षित हैं? वर्तमान में कोरोना भारत में फिर से पैर पसार रहा है. इससे लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि 2022 तक लगाये गये पुरानी वैक्सीन इस नये वेरियंट पर कितनी असरदार रहेगी.
सिंगापुर में अब तक जिन नमूनों के जीनोम की इंडेक्सिंग की गई है, उनमें से ज़्यादातर मामले जेएन.1 वैरिएंट के पाये गये हैं. लेकिन ये जेएन.1 वैरिएंट नया नहीं है. यह ओमिक्रॉन का एक सब-वैरिएंट है जिसे पिछले कुछ वर्षों में खोजा गया है.
डॉक्टरों का कहना है कि जेएन.1 कोरोना के ओमिक्रॉन वायरस का ही एक सब-वैरिएंट है और यह कोई नया वायरस नहीं है और यह सामान्य सर्दी जुकाम जैसा ही है. नया वैरिएंट तेज़ी से फैल रहा है लेकिन इसकी गंभीरता कम है और यह जल्दी ठीक हो जा रहा है.
रही बात पुराने वैक्सिन की तो डॉक्टरों का कहना है कि पुराने वायरस पर भी यह वैक्सिन पूरी तरह से असरकारक नहीं थी. लेकिन जिन्होंने यह वैक्सिन लगवा रखा है, उनको थोड़ा लाभ ज़रुर होगा. लेकिन जिन्होंने वैक्सिन लगवा रखा है, उन्हें यह नया वायरस अपनी चपेट में नहीं लेगा, ऐसा नहीं है.
डॉक्टरों का मानना है कि नए वैरिएंट पर पुराना वैक्सिन काम नहीं करेगा. ऐसे में लोगों को हर साल नया वैक्सिन लगवाना पड़ेगा.