बस्तर के जल जीवन मिशन लाभार्थी गांव में दूषित पानी पीकर 15 गंभीर
जगदलपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक के एक गांव में दूषित पानी पीने से 15 से ज्यादा लोग बुरी तरह से बीमार पड़ गए हैं. इनमें कुछ लोगों को तोकापाल स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है. वहीं कुछ ग्रामीणों का गांव में ही इमली के पेड़ के नीचे ईलाज किया जा रहा है.
दरअसल दरभा ब्लॉक के चिड़पाल गांव के जूनापानी पारा में पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण एक कुएं का गंदा पानी पी रहे हैं. इस पानी को पीने के बाद लगातार एक के बाद एक ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ने लगी.
इसके बाद कुछ ग्रामीणों को तोकापाल स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया. मामला बिगड़ते देख स्वास्थ्य विभाग ने इस गांव में स्वास्थ शिविर लगाया है और 10 से ज्यादा ग्रामीणों का गांव में ही इलाज किया जा रहा है.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दूषित पानी पीने से ग्रामीण उल्टी दस्त के शिकार हो गए हैं. यहां स्वास्थ्य शिविर लगाने के बाद पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं. प्रारंभिक जांच में पानी में बैक्टीरिया और उच्च मलीनता से रोग फैलने का पता चला है.
ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव में दो हैडपम्प और दो कुआं है. हैंडपंप से पानी नहीं आता इसलिए ग्रामीण पीने के पानी के लिए कुएं का इस्तेमाल कर रहे थे. हाल ही में बस्तर में हुई बारिश के कारण गांव के पास में ही मौजूद गिट्टी खदानों से बहकर आया गंदा पानी इस कुएं में चला गया और इसे पीकर ग्रामीण बीमार पड़ गए.
ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी को पीने के अलावा कोई चारा नहीं था.
जल जीवन मिशन में 100 फीसदी काम का दावा
इधर जूनापानी पारा में हुई घटना ने पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है.
इस गांव के ग्रामीणों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की जल जीवन मिशन योजना पिछले 4 वर्षों से अधूरी पड़ी है. विभाग की रिपोर्ट में तो चिड़पाल गांव में जल जीवन मिशन का काम शत प्रतिशत किया जाना बताया गया है.
लेकिन इस योजना से ठेकेदार और विभाग के अधिकारियों को तो लाभ हुआ पर वास्तविक हितग्राही ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल के लिए परेशान हैं. गांव में योजना से टंकी और पाइपलाइन बिछाकर लोगों के घरों तक कनेक्शन पहुंचा दिए गए हैं, लेकिन पानी की सप्लाई के लिए बोर नहीं किया गया है.
ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर कई बार पीएचई विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. खास बात यह है कि इस तरह की घटना केवल एक गांव या ब्लॉक की नहीं है बल्कि बस्तर के लगभग सभी ब्लॉक के कई गांवों मे जल जीवन मिशन का काम अधूरा पड़ा हुआ है.
ताज़ा घटना ने विभाग के अधिकारियों के दावों के भी पोल खोल दिए हैं. कई जगह नल और पाइप तो बिछा दिए गए हैं, लेकिन ना ही ऐसे गांव में बोर खोदा गया और ना ही कनेक्शन जोड़े गए हैं.
ऐसे में ग्रामीण हैंडपंप का फ्लोराइड युक्त पानी या फिर कुँए का पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं. हालांकि कुछ गांवों में सोलर पैनल से चलने वाले पंप से ग्रामीणों को पानी पहुंचाया जा रहा है लेकिन अधिकांश गांवों में जल जीवन मिशन योजना दम तोड़ चुकी है.
सालों से जल जीवन मिशन का काम अधूरा पड़ा
चिड़पाल के सरपंच मंगड़ूराम नाग और दूसरे ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पीएचई कार्यालय में शिकायत की, लेकिन कोई जवाबदेही तय नहीं हुई.
विभाग के अधिकारियों ने पिछले साल भी यही कहा था कि काम जल्द से जल्द पूरा होगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि काम के नाम पर कागजी खानापूर्ति चल रही है.
ग्रामीणों के आक्रोश के बाद विभाग के कार्यपालन अभियंता एचएल मरकाम से बात करने का प्रयास किया गया, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया. इधर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जुनापानी पारा में जल जीवन मिशन का काम आखिर कब तक अधूरा पड़ा रहेगा?
बस्तर के कलेक्टर एस. हरीश का कहना है कि जल जीवन मिशन का काम अधूरा क्यों पड़ा है इसकी जानकारी पीएचई विभाग से ली जा रही है. साथ ही बीमार हुए ग्रामीणों को उचित इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं.
उन्होंने कहा कि साथ ही गांव में भी जब तक सभी बीमार स्वस्थ नहीं हो जाते तब तक स्वास्थ्य शिविर लगाए रखने के आदेश दिए गए है.