छत्तीसगढ़ में ट्रेन से उतारे गए बंगाल के तीन नाबालिग, TMC का आरोप
कोलकाता । डेस्क: अन्य राज्यों में बंगाली भाषियों पर कथित लक्षित हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ताजा मामला छत्तीसगढ़ का है, जहां पश्चिम बंगाल के तीन युवकों को कथित तौर पर बंगाली बोलने के कारण ट्रेन से उतार दिया गया.
पीड़ितों की पहचान कार्तिक दास, राकेश दास और रतन दास के रूप में हुई है, जो पूर्व बर्दवान जिले के केतुग्राम के निवासी हैं और स्थानीय स्कूल में कक्षा 9 के छात्र बताए जा रहे हैं. वे गुजरात के सूरत में एक ब्रेड फैक्ट्री में काम करने जा रहे थे.
जानकारी के अनुसार तीनों युवक शुक्रवार को घर से निकले थे. शनिवार शाम उनके परिजनों को फोन कर बताया गया कि रायपुर रेलवे पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है.
घटना को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है और आरोप लगाया है कि युवकों को केवल बंगाली भाषा में बातचीत करने के कारण निशाना बनाया गया.
केतुग्राम से टीएमसी विधायक शेख सहनवाज़ ने कहा कि युवकों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए गए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-शासित राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और पार्टी इस तरह की घटनाओं के खिलाफ आंदोलन कर रही है.
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी हाल ही में आरोप लगाया था कि भाजपा-शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले प्रवासी श्रमिकों को परेशान किया जा रहा है.
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान का आश्वासन देते हुए कहा है कि पार्टी अगले तीन महीनों में प्रवासी मजदूरों का विस्तृत डेटा एकत्र करेगी और ऐसे कदम उठाएगी ताकि रोजगार के लिए बंगाल के लोगों को राज्य से बाहर न जाना पड़े.