राहुल गांधी ने मनुस्मृति का दिया हवाला, बोले- 'महिलाएं तोड़ें पिंजरा'
पुणे । डेस्क: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में छात्रों के संवाद कार्यक्रम के तहत आयोजित महिला-विशेष सत्र में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने प्राचीन संस्कृत ग्रंथ मनुस्मृति के एक अंश का उल्लेख करते हुए महिलाओं पर थोपी जाने वाली सामाजिक बंदिशों की आलोचना की और उनसे अपनी पहचान बनाने का आग्रह किया.
राहुल गांधी ने कहा कि वह राजनीति पर चर्चा करने या भाषण देने नहीं, बल्कि युवाओं की बात सुनने आए हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल बेटी, पत्नी या मां जैसे रिश्तों और दायरों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान होनी चाहिए.
मनुस्मृति का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि इसमें महिलाओं को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति के न रहने पर बेटों के अधीन रहने की बात कही गई है. उन्होंने इसे निराशाजनक और आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि ऐसी बातें कभी नहीं कही जानी चाहिए थीं.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया-प्रत्यक्ष शारीरिक हिंसा, आर्थिक हिंसा और अवसरों के नुकसान से उत्पन्न हिंसा.
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि देश में हर साल लाखों बच्चियों की जन्म से पहले ही हत्या कर दी जाती है, जबकि लगभग 29-30 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक और 6 प्रतिशत यौन हिंसा का सामना करती हैं. सुरक्षा कारणों और हिंसा के डर से 50 प्रतिशत महिलाएं शिक्षा या रोजगार बीच में ही छोड़ देती हैं.
सुरक्षा पर होने वाले खर्च का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा चिंताओं के कारण भारत में एक औसत महिला को सालाना अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है. उन्होंने युवाओं से अपनी मौलिकता और सपनों को पहचानते हुए सामाजिक रूढ़ियों का पिंजरा तोड़ने का आह्वान किया.