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'नसबंदी वापस' सर्जरी करा पूर्व नक्सली बनेंगे पिता

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01 जून 2026, 01:27 AM 3 मिनट में पढ़ें 4

नसबंदी वापस सर्जरी-जगदलपुर
नसबंदी वापस सर्जरी-जगदलपुर

जगदलपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर में समाज की मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व नक्सलियों के पारिवारिक पुनर्वास के लिए प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील कदम उठाया है. नक्सली संगठन में रहने के दौरान जिन युवाओं की जबरन नसबंदी करा दी गई थी, उन्हें अब फिर से पिता बनने का सौभाग्य मिल सकेगा. 


जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर इसके लिए जगदलपुर के महारानी अस्पताल में एक विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया, जहाँ आत्मसमर्पण कर चुके 28 युवाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनके उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई है.

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निजी अस्पतालों में इस जटिल रिकैनालाइजेशन (नसबंदी खोलने) ऑपरेशन का खर्च करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक आता है, लेकिन शासन के प्रयास से महारानी अस्पताल में यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क की जा रही है. 


अस्पताल के सीएस डॉ. संजय प्रसाद ने बताया कि पहले चरण में आए सभी युवाओं की नसबंदी खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य इच्छुक युवाओं को भी इस शिविर का लाभ दिया जाएगा. इसके लिए अस्पताल में विशेष प्रबंध किए गए हैं.


इस अनूठे अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए एम्स रायपुर और यूरोलॉजिकल सोसायटी वेस्टर्न जोन के विशेषज्ञ यूरोलॉजिस्ट डॉक्टरों की एक टीम बस्तर पहुंची थी. डॉक्टरों ने शिविर में शामिल सभी 28 पूर्व नक्सलियों की सघन जांच की है. 


इस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जो भी युवा इस सर्जरी के लिए फिट पाए जाएंगे, उनके रिकैनालाइजेशन ऑपरेशन किए जाएंगे ताकि वे एक सामान्य और खुशहाल वैवाहिक जीवन जी सकें.


दरअसल, बस्तर के जंगलों में सक्रिय नक्सली संगठन पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों के पालन-पोषण को अपनी हिंसक गतिविधियों में बाधा मानते थे. इसी कारण संगठन में शामिल होने वाले पुरुष सदस्यों की इच्छा के खिलाफ उनकी नसबंदी करवा दी जाती थी. 


मुख्यधारा में लौटने और शादी करने के बाद भी ये लोग संतान सुख से वंचित थे, जिससे वे भारी मानसिक और सामाजिक तनाव से गुजर रहे थे. अब प्रशासन के इस प्रयास से उनके जीवन की यह कमी दूर होने की उम्मीद जगी है.


प्रशासन का मानना है कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास सिर्फ आर्थिक मदद या नौकरी देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें एक गरिमामय पारिवारिक जीवन जीने का पूरा अधिकार है. 


शिविर के दौरान बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी शलभ सिन्हा ने इन युवाओं से मुलाकात की. अधिकारियों ने सभी को समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सरकार की पुनर्वास नीतियों का लाभ उठाने और एक सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP