छत्तीसगढ़ के सीएम साय व पूर्व सीएम बघेल बिहार चुनाव में आमने-सामने
रायपुर । संवाददाता: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी अचानक रफ्तार पकड़ ली है. हालांकि यह चुनाव दूसरे राज्य का है, लेकिन छत्तीसगढ़ की दोनों प्रमुख पार्टियां - कांग्रेस और बीजेपी - बिहार की इस कड़ी जंग में अहम भूमिका निभाने को तैयार हैं.
बीजेपी की ओर से सबसे बड़ा दांव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर लगाया जा रहा है. पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, साय को स्टार प्रचारक के तौर पर नामित किया गया है. वे बिहार में एनडीए के अभियान को मजबूत करने के लिए कैंप करेंगे, साथ ही छत्तीसगढ़ से एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेता - जिसमें मंत्री, सांसद और संगठन के पदाधिकारी शामिल हैं - भी मैदान में उतरेंगे.
इन नेताओं को विधानसभा क्षेत्रवार जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, ताकि जमीनी स्तर पर अभियान को गति मिल सके. बिहार सरकार में मंत्री और छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी नितिन नाबिन भी दोनों राज्यों के बीच मजबूत कड़ी का काम करेंगे.
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बिहार चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. यह फैसला पार्टी की रणनीति को दर्शाता है, जिसमें बघेल के संगठनात्मक कौशल और चुनावी अनुभव का पूरा फायदा उठाया जाएगा.
बघेल अब कांग्रेस के बिहार अभियान का मुख्य चेहरा बन चुके हैं. उन्होंने कहा, "बिहार में अब वोट की चोरी बर्दाश्त नहीं होगी." उनका दावा है कि कांग्रेस गठबंधन सरकार बनाने को आश्वस्त है.
कांग्रेस के अंदरूनी स्रोत बताते हैं कि बघेल के साथ ही ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के प्रभारी देवेंद्र यादव भी महत्वपूर्ण सीटों पर रणनीति संभालेंगे. यादव हाल ही में राहुल गांधी के बिहार दौरे में उनके साथ थे. पार्टी छत्तीसगढ़ से दो दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं को भी तैनात करने की तैयारी में है, जो जिलों और विधानसभा क्षेत्रों का प्रबंधन करेंगे.
बघेल की यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ कांग्रेस को नई ऊर्जा दे रही है, खासकर पिछले साल की हार के बाद नेताओं को राष्ट्रीय पटल पर वापसी का मौका मिला है. बघेल ने राहुल गांधी के 16 दिवसीय बिहार प्रवास को कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया, जो मतदाताओं को भी जोड़ेगा.
बीजेपी की ओर से भी राजनीतिक तंज कसे जा रहे हैं. सांसद संतोष पांडेय ने बघेल की नियुक्ति पर चुटकी ली, "भूपेश बघेल जहां जाते हैं, वहां कांग्रेस का पतन हो जाता है." उन्होंने बघेल को राहुल-प्रियंका गांधी का 'एटीएम' तक करार दिया और कहा कि कांग्रेस इसका 'उपयोग' करने की फिराक में है. पांडेय समेत कई कैबिनेट मंत्री जमीनी अभियान के लिए तैयार किए जा रहे हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार का यह मिशन छत्तीसगढ़ की आंतरिक राजनीति पर भी असर डालेगा.
बघेल के लिए यह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता मजबूत करने का अवसर है, वहीं बीजेपी मुख्यमंत्री साय को राज्य सीमाओं से परे एक प्रभावशाली नेता के रूप में पेश करना चाहती है.
दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं की सक्रियता से बिहार का चुनाव छत्तीसगढ़ के लिए प्रतिष्ठा की जंग बन गया है. (फाइल फोटो)