सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

HC ने पीजी मेडिकल में आरक्षण पर राज्य का रुख मांगा

C

CG Khabar

08 सित. 2025, 08:23 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

हाईकोर्ट
हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश नियम 2021 के नियम 11(ए) और नियम 11(बी) के एक हिस्से की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है. याचिका में दावा किया गया है कि ये नियम पीजी मेडिकल प्रवेश में संस्थान और निवास आधारित आरक्षण प्रदान करते हैं, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हैं.


इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने की.

विज्ञापन


याचिका में नियम 11(ए) को चुनौती दी गई है, जो उन उम्मीदवारों को प्रवेश में प्राथमिकता देता है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है या जो वर्तमान में कार्यरत (सर्विंग) उम्मीदवार हैं. इसके अलावा, नियम 11(बी) के उस हिस्से को भी चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यदि नियम 11(ए) के तहत प्रवेश प्रक्रिया के बाद सीटें खाली रहती हैं, तो उन सीटों पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्रवेश दिया जाएगा, जो राज्य के बाहर के कॉलेजों से एमबीबीएस डिग्री प्राप्त किए हैं.


याचिकाकर्ता का तर्क है कि ये नियम छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दो श्रेणियों में बांटते हैं: (i) जिन्होंने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस किया है, और (ii) जिनके पास छत्तीसगढ़ का डोमिसाइल है, लेकिन उन्होंने राज्य के बाहर के कॉलेजों से एमबीबीएस डिग्री प्राप्त की है. याचिका में दावा किया गया है कि नियम 11(ए) के तहत उम्मीदवारों को 100% आरक्षण देना और नियम 11(बी) के तहत बची हुई सीटों पर ही अन्य उम्मीदवारों को मौका देना एक भेदभावपूर्ण और शक्ति का दुरुपयोग है. याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया, क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के निवासियों और अन्य के बीच अनुचित वर्गीकरण करता है.


याचिकाकर्ता, जो छत्तीसगढ़ की स्थायी निवासी है, ने 2018 में नीट (यूजी) परीक्षा दी थी और काउंसलिंग के आधार पर तमिलनाडु के सलेम स्थित वीएमकेवी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था. उन्होंने 2023 में एमबीबीएस पूरा किया और अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करने के बाद तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल और छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से मेडिकल पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त किया. इसके बाद, उन्होंने नीट (पीजी) 2025 में भाग लिया और पीजी मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए पात्र हुईं. हालांकि, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने परिणाम घोषित कर दिए हैं, लेकिन काउंसलिंग की तारीख अभी तय नहीं हुई है.


याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उप-नियमों का अनुप्रयोग छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले उम्मीदवारों को 100% आरक्षण प्रदान करता है, जो भेदभावपूर्ण है. उन्होंने डॉ. तन्वी भेल बनाम श्रेया गोयल (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पीजी मेडिकल प्रवेश में डोमिसाइल या निवास आधारित आरक्षण असंवैधानिक है.


कोर्ट ने राज्य को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और याचिकाकर्ता को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया. मामले को अब चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP