बिहार नतीजों से छत्तीसगढ़ में 'भूचाल': कांग्रेस-BJP में भीषण तकरार
रायपुर । संवादाता: बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को मिले निर्णायक जनादेश ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया टकराव पैदा कर दिया है. कांग्रेस और BJP के नेता एक-दूसरे पर तीखे हमले बोल रहे हैं, क्योंकि दोनों दल आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले जनता की राय को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सबसे बड़ा हमला बोलते हुए बिहार के नतीजों पर बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया. उन्होंने 'X' पर एक पोस्ट में लिखा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बिहार जीत पर बधाई. आपने बहुत मेहनत की, 64 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए. 16 लाख नए आवेदकों में से 21 लाख नाम जोड़े गए. हेरफेर की परत दर परत. भाजपा के लिए इससे अच्छा कोई सहयोगी नहीं.”
बघेल के इन आरोपों पर छत्तीसगढ़ की सत्तारूढ़ BJP ने तुरंत पलटवार किया. राज्यभर में NDA कार्यकर्ताओं ने बिहार की जीत का जश्न मनाया, वहीं उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस नेतृत्व और बिहार चुनाव में बघेल की भूमिका पर निशाना साधा.
विजय शर्मा ने कहा, "श्री बघेल को अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करना चाहिए. हर स्थिति को जबरदस्ती हल करने जैसा मानकर कोई प्रभावी नेता नहीं बन सकता."
उन्होंने EVMs पर राहुल गांधी के लगातार हमलों का भी जिक्र करते हुए कहा, "जब परिणाम उनके पक्ष में नहीं होते, तो वह अपने ही नेताओं, फिर कार्यकर्ताओं और अंत में मशीन को दोष देते हैं. बहाने बनाने का यह सिलसिला जनता के विश्वास को कमजोर करता है."
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भले ही बिहार चुनाव कई राज्यों दूर लड़ा गया हो, लेकिन इसका असर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में तुरंत देखा जा रहा है. पत्रकार शिवम दुबे ने कहा कि NDA का प्रदर्शन एक मजबूत संगठनात्मक संरचना और प्रभावी अभियान को दर्शाता है. उन्होंने टिप्पणी की, "बिहार का जनादेश स्पष्ट रूप से दिखाता है कि मतदाताओं ने NDA के विकास, स्थिरता और समन्वित नेतृत्व के संयुक्त संदेश पर प्रतिक्रिया दी."
यह गठबंधन राष्ट्रीय नेतृत्व और स्थानीय रणनीति के बीच संतुलन बनाने में सफल रहा है, जिसने मतदाताओं को पेश किए जा रहे शासन मॉडल में विश्वास दिलाया है.
जैसे-जैसे दोनों राजनीतिक दल अपनी बयानबाजी तेज कर रहे हैं, बिहार विधानसभा के नतीजे अब सिर्फ एक दूर का चुनावी परिणाम नहीं रहे, बल्कि वे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई दरार बनकर उभरे हैं.
कांग्रेस जहां इस फैसले को संस्थागत कमजोरी के रूप में दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं BJP इसे शासन और स्थिरता के सार्वजनिक समर्थन के रूप में पेश कर रही है. ऐसे में राज्य में राजनीतिक लड़ाई आने वाले हफ्तों में और तेज होने वाली है.