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दिल्ली में अफगान मंत्री मुत्ताकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों पर बैन

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10 अक्टू. 2025, 05:21 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

अमीर खान मुत्ताकी
अमीर खान मुत्ताकी

नई दिल्ली । डेस्क: अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के भारत दौरे के दौरान नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को कथित तौर पर प्रवेश न दिए जाने पर भारी आलोचना हो रही है. इस कदम को तालिबान की गहरी महिला विरोधी विचारधारा का प्रतिबिंब माना जा रहा है.


विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपनी बैठक के बाद हुई इस प्रेस वार्ता में केवल पुरुष पत्रकार ही शामिल हुए, जिसके बाद पत्रकार बिरादरी और पर्यवेक्षकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने भारत सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं कि देश की धरती पर इस तरह के भेदभाव की अनुमति कैसे दी गई.

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'द हिंदू' की पत्रकार सुहासिनी हैदर ने विदेश मंत्रालय से पूछा कि क्या उसे महिला पत्रकारों को आमंत्रित न किए जाने की जानकारी थी और क्या उसने इस तरह के बहिष्कार को मंजूरी दी? उन्होंने इसे "भयानक और अवैध भेदभाव" बताते हुए कहा, "यह व्यावहारिकता नहीं, बल्कि समर्पण है."


What is even more ridiculous is that the Taliban FM is allowed to bring their abhorrent and illegal discrimination against women to India, as the government hosts the Taliban delegation with full official protocol.

This isn't pragmatism, this is supplication. https://t.co/0FimOp6gpH
— Suhasini Haidar (@suhasinih) October 10, 2025


'द हिंदू' की उप-संपादक विजिता सिंह ने सुझाव दिया कि पुरुष पत्रकारों को विरोध में वॉकआउट कर देना चाहिए था. एक अन्य महिला पत्रकार ने उनके पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा, "बिल्कुल... यह तस्वीर दिखाती है कि उन सभी ने महिलाओं के खिलाफ तालिबान की विचारधारा को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया. यह बिल्कुल शर्मनाक है."


In my opinion, the male journalists should have walked out of the press conference as a mark of protest. https://t.co/fQ7epjCljq
— Vijaita Singh (@vijaita) October 10, 2025


दिल्ली में मौजूद पत्रकार स्मिता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर साझा करते हुए इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि जयशंकर के शुरुआती भाषण या मुत्ताकी के साथ बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में अफगान महिलाओं और लड़कियों की भयानक स्थिति का कोई उल्लेख नहीं किया गया. उन्होंने लिखा कि सुरक्षा चिंताओं के कारण मुत्ताकी को ऐसे देश में 'रेड कार्पेट वेलकम' मिल रहा है, जहाँ हम महिला उपलब्धियों और नेतृत्व पर गर्व करते हैं.


वरिष्ठ रणनीतिक मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. तारा कार्था ने मुत्ताकी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए 'X' पर लिखा कि तालिबान की महिलाओं से संबंधित नीति को देखते हुए वह निश्चित नहीं थीं कि उन्हें यह तस्वीर पोस्ट करनी चाहिए या नहीं.


अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से, तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों पर गंभीर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें उन्हें माध्यमिक विद्यालयों, उच्च शिक्षा और अधिकांश कार्यस्थलों से बाहर रखना शामिल है. मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने उनके इस रवैये को 'लैंगिक रंगभेद' की प्रणाली करार दिया है.


गौरतलब है कि मुत्ताकी का यह दौरा तालिबान के अधिग्रहण के बाद से भारत में सर्वोच्च स्तर के तालिबान प्रतिनिधिमंडल का दौरा है, जिसमें राजनयिक, व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई. जयशंकर ने भारत की तरफ से अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भारत ने काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलने की योजना की भी घोषणा की है.


महिला पत्रकारों को बाहर रखने की आलोचना पर विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP