ढोलकाल पर्वत पर जान जोखिम में डाल सेल्फी ले रहे युवा
दंतेवाड़ा | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद ढोलकाल पर्वत का नजारा बारिश के दिनों में और भी खूबसूरत हो जाता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में पर्यटक ढोलकाल पहुंच रहे हैं.
यहां करीब 3500 फीट की ऊंचाई पर भगवान गणेश की पत्थर की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है. जिसका दर्शन करने युवा ऊपर तक चढ़ रहे हैं. इतनी ऊंचाई में सेल्फी लेने के लिए कुछ युवा लापरवाही बरतते हुए, अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं. जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हो रहा है.
दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दूदावत ने पर्यटकों से अपील की है कि एक निश्चित जगह से ही भगवान के दर्शन करें. सेल्फी के लिए अपनी जान जोखिम में ना डालें.
दरअसल, ढोल के समान आकृति की वजह से इस पर्वत का नाम ढोलकाल पर्वत पड़ा है. यहां करीब 3500 फीट की ऊंचाई पर भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है.
यह मूर्ति बप्पा की ललितासन मुद्रा में है. ऐसे दुर्लभ प्रतिमा बस्तर के अलावा और कहीं नहीं हैं. भगवान गणेश की यह प्रतिमा आयुध रूप में विराजित है.
ढोलकाल के प्रसिद्ध गणेश प्रतिमा पर एक पौराणिक कथा प्रचलित है. कथा के अनुसार ढोलकाल शिखर पर भगवान गणेश और परशुराम का युद्ध हुआ था, जिसमें भगवान का एक दांत टूट गया था.
इसके बाद ही भगवान गणेश एकदंत कहलाए. इस घटना की याद में ही छिंदक नागवंशी राजाओं ने इस छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की.
परशुराम के फरसे से भगवान गणेश का दांत टूटा था इसलिए पहाड़ के शिखर के नीचे गांव का नाम फरसपाल रखा गया है.
बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में यहां पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन इतनी ऊंचाई में सेल्फी लेने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं.
यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होने की वजह से और गार्ड की तैनाती नहीं होने से युवा गणेश प्रतिमा के पीछे सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं जो जानलेवा साबित हो सकता है. ः