अडानी की कोयला खदान के विरोध में रायगढ़ में ग्रामीणों का प्रदर्शन
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अडानी समूह को आवंटित पुरंगा कोयला ब्लॉक के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध बुधवार को और तेज़ हो गया. धर्मजयगढ़ क्षेत्र के सैंकड़ों ग्रामीणों ने प्रस्तावित खदान की सार्वजनिक सुनवाई को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए ज़िला कलेक्ट्रेट तक मार्च किया.
प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर "जल, जंगल, ज़मीन हमारा है" जैसे नारे लिखे थे. प्रदर्शनकारियों ने ज़िला कलेक्टर के कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और कलेक्टर से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी आपत्तियों को सुनने की मांग की.
जानकारी के अनुसार, धर्मजयगढ़ विकासखंड के तेंदुमुड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस प्रस्तावित भूमिगत कोयला खदान को स्थानीय ग्राम सभा पहले ही अस्वीकार कर चुकी है. पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (PESA) के प्रावधानों के तहत आयोजित एक विशेष बैठक में, ग्राम सभा ने अडानी समूह का हिस्सा मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड की परियोजना के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था.
कंपनी की योजना 869.025 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली 2.25 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली एक भूमिगत कोयला खदान विकसित करने की है. इस क्षेत्र में 621 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है.
ग्रामीणों की मुख्य आपत्ति यह है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत उनके कई व्यक्तिगत दावों का अभी तक निपटारा नहीं हुआ है. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एक ग्रामीण ने कहा, "हमारे वन अधिकारों का निपटारा किए बिना परियोजना के साथ आगे बढ़ना अवैध है. इससे हमारे जंगल, खेत और जीविका के लिए जिन जानवरों पर हम निर्भर हैं, वे सब नष्ट हो जाएंगे."
वन अधिकार कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इस हिस्से में तेज़ी से हो रहे औद्योगिक विस्तार की पारिस्थितिक और सामाजिक कीमत बहुत भारी है. उन्होंने कहा कि "भारी ट्रकों की अनियंत्रित आवाजाही ने सड़कों को खतरनाक बना दिया है, जबकि वनों के विनाश ने हाथियों के हमलों को और बढ़ा दिया है."
त्रिपाठी ने आगे बताया कि व्यापक खनन के कारण पशुधन कम हो गया है और खेती की ज़मीनें अनुपयोगी हो गई हैं. उन्होंने कहा कि "जब कारखाने और खदानें पहली बार आईं, तो लोगों को लगा था कि वे समृद्धि लाएंगे, लेकिन तीन दशक बाद उन्हें निराशा मिली है. ग्रामीणों ने अब अपनी जल, जंगल और ज़मीन की रक्षा करने का संकल्प ले लिया है."
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 11 नवंबर को निर्धारित सार्वजनिक सुनवाई को रद्द नहीं किया गया, तो वे पूरे क्षेत्र में एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे. उत्तरी रायगढ़ के वन क्षेत्र में परियोजना का विरोध लगातार बढ़ने के बावजूद, ज़िला प्रशासन ने अभी तक ग्रामीणों की मांग पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है.