मंगल, 20 अक्टू. 2026

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अमेरिका में अब नया युद्ध छेड़ने की ताकत नहीं- IRGC प्रवक्ता

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर छेड़े गए युद्ध के सात महीने बाद, IRGC के प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेब्बी ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के क्षेत्रीय सैन्य ठिकाने खंडहर बन चुके हैं और Strait of Hormuz पर ईरान का नियंत्रण बरकरार है. यदि अमेरिका ने चुनाव से ठीक पहले कोई नई हिमाकत की, तो दुनिया को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा.

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20 अक्टू. 2026, 11:25 AM 7 मिनट में पढ़ें 16

तेहरान टाइम्स साक्षात्कार
तेहरान टाइम्स साक्षात्कार

सीजीखबर डेस्क । रायपुर: तेहरान टाइम्स को दिए एक विशेष साक्षात्कार में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेब्बी ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य संघर्ष, क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिति और ईरान की भावी सैन्य तैयारियों पर खुलकर बात की. शहीद जनरल अली-मोहम्मद नैनी के स्थान पर जिम्मेदारी संभालने वाले जनरल मोहेब्बी ने स्पष्ट किया कि सात महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अमेरिका अपने किसी भी घोषित या अघोषित उद्देश्य को हासिल करने में पूरी तरह से विफल रहा है.

क्या अमेरिका और इजरायल नए सैन्य दुस्साहस की तैयारी में हैं?

साक्षात्कार के दौरान जब जनरल मोहेब्बी से पूछा गया कि क्या अमेरिका और इजरायल एक बार फिर युद्ध को भड़काने या किसी नए संघर्ष की ओर बढ़ रहे हैं, तो उन्होंने सैन्य दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि एक सशस्त्र बल के रूप में वे हर संभव परिदृश्य के लिए तैयार हैं. हालांकि, उनके आकलन के मुताबिक अमेरिका इस स्थिति में बिल्कुल नहीं है कि वह कोई नया मुकाम हासिल करने के लिए नया युद्ध शुरू कर सके.

उन्होंने बताया कि युद्ध की शुरुआत में अमेरिका अपनी पूरी ताकत, सुसज्जित ठिकानों और नए सैनिकों के साथ मैदान में उतरा था, लेकिन इसके बावजूद उसे रणनीतिक हार का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ा झटका होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है, जिसे अमेरिका तमाम कोशिशों के बाद भी आज तक नहीं खोल सका है.

जनरल मोहेब्बी के अनुसार, फारस की खाड़ी में एक समय अमेरिका के 30 से 40 युद्धपोत मौजूद रहते थे, लेकिन आज उनकी उपस्थिति शून्य है. अमेरिकी बल होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग सात सौ किलोमीटर दूर पीछे हट चुके हैं. जॉर्डन और सीरिया स्थित अल-अज्रक और अल-तन्फ जैसे दूरस्थ सैन्य ठिकानों पर तैनात अमेरिकी सैनिक भी अब सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि वे ईरान के सीधे निशाने पर हैं.

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चुनाव से पहले अमेरिकी दुस्साहस और संभावित वैश्विक ऊर्जा संकट

IRGC प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि भले ही अमेरिका में व्यापक सैन्य अभियान की क्षमता न बची हो, लेकिन आगामी अमेरिकी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक लाभ लेने के लिए वहां का नेतृत्व किसी सीमित कार्रवाई का दुस्साहस कर सकता है. उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ऐसी कोई गलती करता है, तो ईरान का जवाब पहले से कहीं अधिक भीषण और विनाशकारी होगा.

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने अभी तक अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए जलडमरूमध्य को पूरी तरह से सील नहीं किया है. यदि अमेरिका कोई नया कदम उठाता है, तो पूरी दुनिया को एक भयानक ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा. यूरोप में ठंड का मौसम करीब आ रहा है और ऐसे समय में ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी बाधा से वैश्विक स्तर पर अमेरिका के खिलाफ जनक्रोश पैदा होगा.

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान ने अभी तक Strait of Hormuz, Bab al-Mandab Strait और Suez Canal को एक साथ जोड़ने के अपने रणनीतिक विकल्प का उपयोग नहीं किया है. अगर अमेरिका ने कोई नई सीमा पार की, तो ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों और प्रतिरोध मोर्चे की पूरी ताकत का इस्तेमाल करेगा.

17 जुलाई की घटना और इस्लामाबाद समझौते के टूटने का सच

साक्षात्कार में जब 7 जुलाई को तेल टैंकरों पर हुए हमलों और इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (Islamabad MoU) के ध्वस्त होने पर सवाल किया गया, तो जनरल मोहेब्बी ने अमेरिका के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी नाकामी छुपाने के लिए कुतर्क कर रहा है, जबकि समझौते का मुख्य उल्लंघनकर्ता वह खुद है.

उन्होंने ब्योरा देते हुए बताया कि समझौते के ठीक बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय देशों का दौरा कर एक ऐसा बयान जारी किया जो समझौते की शर्तों के पूरी तरह खिलाफ था. इसके अलावा, समझौते की धारा पांच के तहत जहाजों की आवाजाही ईरानी व्यवस्था के अनुसार होनी तय हुई थी, लेकिन अमेरिका ने ओमान के तट के पास एक नया गैर-कानूनी रास्ता खोलने की कोशिश की और जहाजों को वहां से गुजरने पर मजबूर किया.

जनरल मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिका का यह विश्वासघात कोई नया नहीं है. इससे पहले भी उसने वार्ताओं के दौरान 13 जून 2025 और 28 फरवरी को हमले किए थे. ऐसे में 7 जुलाई को ईरान द्वारा दिया गया मुंहतोड़ जवाब पूरी तरह से समन्वित, तर्कसंगत और सैन्य नेतृत्व के आदेशानुसार था. उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि यह किसी 'अराजक' या 'बिना तालमेल वाले' लड़ाकों का काम था. उन्होंने कहा कि ईरान की सेना में अनुशासन सर्वोपरि है और यदि समय पीछे चला जाए, तो ईरान फिर से वही निर्णायक कार्रवाई दोहराएगा.

मोज़ेक डिफेंस स्ट्रक्चर और 'रॉग एक्शन' के बीच का अंतर

जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान की 'मोज़ेक रक्षा प्रणाली' (Mosaic Defense) के कारण निचले स्तर के कमांडर बिना शीर्ष अनुमति के ऐसी कार्रवाई कर सकते हैं, तो उन्होंने इस सोच को मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा बताया.

जनरल मोहेब्बी ने स्पष्ट किया कि 'रॉग एक्शन' का मतलब बिना आदेश के काम करना होता है, जो ईरानी सशस्त्र बलों में असंभव है. वहीं 'मोज़ेक डिफेंस' एक सुव्यवस्थित सैन्य सिद्धांत है. इसके तहत यदि वरिष्ठ कमांडर शहीद हो जाते हैं या संचार संपर्क टूट जाता है, तो उत्तराधिकार की तय श्रृंखला के अनुसार अगले कमांडर युद्ध के मैदान की जरूरतों के हिसाब से निर्णय लेते हैं. यह एक तय सैन्य रणनीति है, न कि कोई अव्यवस्था. अमेरिका इस तरह की अफवाहें फैलाकर ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के बीच दरार पैदा करने की नाकाम कोशिश कर रहा है.

युद्ध के मैदान में ईरानी बलों का मनोबल और रक्षा क्षमताएं

सात महीने से अधिक चले इस युद्ध के बाद सैनिकों के मनोबल पर बात करते हुए जनरल मोहेब्बी ने कहा कि पचास डिग्री से अधिक तापमान, कठिन परिस्थितियों और न्यूनतम सुविधाओं के बावजूद ईरानी लड़ाकों का हौसला बुलंद है. उन्होंने कहा कि Sacred Defense (ईरान-इराक युद्ध) के दौर को देखने वाले अनुभवी अधिकारी भी आज के युवाओं के समर्पण और देशभक्ति को देखकर गर्व महसूस करते हैं.

सैन्य क्षमताओं में वृद्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि युद्ध के शुरुआती दिनों की तुलना में आज ईरान की मिसाइल, ड्रोन और वायु रक्षा क्षमताएं डेढ़ गुना से अधिक बढ़ चुकी हैं. दुश्मन का यह सोचना मूर्खतापूर्ण था कि कुछ प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर वह ईरान की सैन्य उत्पादन क्षमता को नष्ट कर देगा. ईरान ने मिसाइलों और ड्रोनों का निर्माण कभी बंद नहीं किया, बल्कि नए केंद्रों को शामिल करके हथियारों की मारक क्षमता, सटीकता और सीमा में अभूतपूर्व इजाफा किया है.

उन्होंने यह भी पुष्टि की कि ईरान के पास ऐसे कई आधुनिक और विनाशकारी हथियार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल उसने अभी तक युद्ध क्षेत्र में नहीं किया है. अब तक केवल पुराने भंडारों का ही उपयोग किया गया है, और विशेष परिस्थितियों के लिए नए हथियारों को सुरक्षित रखा गया है.

क्षेत्रीय देशों का रुख और 'मक्का पैक्ट' की अहमियत

क्षेत्रीय देशों द्वारा अपनी ज़मीन पर अमेरिकी ठिकानों को बनाए रखने के सवाल पर जनरल मोहेब्बी ने कहा कि पड़ोसी देशों को अब यह भली-भांति अहसास हो चुका है कि अमेरिकी सैन्य ठिकाने उनकी सुरक्षा करने में पूरी तरह असमर्थ हैं. ये ठिकाने खुद अपनी रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो दूसरों की सुरक्षा क्या करेंगे.

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ 'मक्का पैक्ट' (Mecca Pact) इस बात का सीधा प्रमाण है कि क्षेत्रीय देश अब बाहरी ताकतों के जाल से बाहर निकलकर आपस में सुरक्षा समझौते कर रहे हैं. ईरान अपने सभी 15 पड़ोसी देशों के साथ हाथ मिलाने और एक संयुक्त क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा तैयार करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान की सुरक्षा के बिना इस पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती.

अमेरिकी जनता के नाम खुला पत्र और वैचारिक संदेश

IRGC द्वारा अमेरिकी जनता को लिखे गए पत्र के उद्देश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी शासन और वहां का मीडिया अपनी जनता से सच्चाई छुपाता है. अमेरिकी नागरिकों द्वारा दिया जाने वाला टैक्स युद्धों, हत्याओं और विदेशी ज़मीनों पर कब्जे में बर्बाद किया जा रहा है, जिसका फायदा केवल पूंजीपतियों और ज़ियोनिस्ट विचारधारा को मिल रहा है. ईरान और अमेरिका की आम जनता के बीच कोई सीधी दुश्मनी नहीं है, यह दुश्मनी वाशिंगटन के शासकों द्वारा थोपी गई है.
 
साक्षात्कार के अंत में, अपने पूर्ववर्ती शहीद जनरल अली-मोहम्मद नैनी की शहादत के बाद इस पद को स्वीकार करने से जुड़े व्यक्तिगत सवाल पर जनरल मोहेब्बी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि उनके या उनके परिवार के मन में इस जिम्मेदारी को संभालने को लेकर कभी कोई संशय नहीं रहा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP