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इजराइल में कैसे होते हैं चुनाव? कौन-कौन हैैं दावेदार?

गाजा युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच इजराइल 27 अक्टूबर को नई संसद चुनने के लिए मतदान करेगा. लंबे समय से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह चुनाव साख की लड़ाई बन चुका है.

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20 अक्टू. 2026, 12:17 PM 4 मिनट में पढ़ें 24

नेतन्याहू
नेतन्याहू

 नई दिल्ली । डेस्क: इजराइल में राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं. देश के लगभग 73 लाख मतदाता 27 अक्टूबर को 26वीं नेसेट यानी इजराइली संसद के 120 सदस्यों को चुनने के लिए वोट डालेंगे. गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई, लेबनान तथा ईरान के साथ बढ़े संघर्ष के बाद देश में हो रहा यह पहला आम चुनाव है. रिकॉर्ड 19 वर्षों तक प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और मुकदमों का भी सामना कर रहे हैं. वर्तमान राजनीतिक स्थिति में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले कट्टरपंथी दक्षिणपंथी गठबंधन और विपक्षी गुट के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है. जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है.

चुनावी प्रणाली और सत्ता का गणित

इजराइल में मतदान प्रक्रिया काफी विशिष्ट है. यहां नागरिक किसी व्यक्ति या उम्मीदवार को सीधे वोट न देकर अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं. संसद में प्रवेश पाने के लिए प्रत्येक पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत मत हासिल करना अनिवार्य होता है. 120 सीटों वाली नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का आंकड़ा हासिल करना आवश्यक है. इजराइली इतिहास में आज तक किसी भी एकल पार्टी को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. मतदान के नतीजे आने के बाद गठबंधन बनाने के लिए 28 दिनों का समय दिया जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है. यदि तय समय सीमा के भीतर कोई भी दल या गठबंधन 61 का आंकड़ा जुटाने में विफल रहता है, तो देश को पुनः चुनाव प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

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मतदान का अधिकार और लोकतांत्रिक विषमता

मध्य पूर्व के इस महत्वपूर्ण चुनाव में लगभग 73 लाख इजराइली नागरिक मताधिकार के योग्य पाए गए हैं. हालांकि, इसी भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लाखों वयस्कों के पास इस सरकार को चुनने का कोई अधिकार नहीं है. गाजा, कब्जा किए गए वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम के लगभग 30 लाख फलस्तीनी नागरिक इस चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हैं, जबकि उनकी सीमाओं, आवाजाही और कानूनी स्थिति पर इसी सरकार का नियंत्रण रहता है. 

वहीं दूसरी ओर, वेस्ट बैंक में बने अवैध यहूदी बस्तियों में रहने वाले 7.5 लाख से अधिक इजराइली नागरिक संसद चुनाव में मतदान कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, विदेशों में रहने वाले आम इजराइली नागरिकों के लिए अनुपस्थित मतदान यानी एब्सेंटी बैलेट की व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें वोट डालने के लिए देश में ही मौजूद रहना अनिवार्य होता है. केवल दूतावासों में तैनात राजनयिकों को ही समय से पहले मतदान की छूट दी गई है.

चुनाव के मुख्य मुद्दे और जनआकांक्षाएं

इस बार का चुनाव केवल राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के सामने मौजूद कई गंभीर आंतरिक और बाह्य चुनौतियों पर जनता का फैसला भी होगा. 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में हुई सुरक्षा चूकों की जांच के लिए अब तक कोई आधिकारिक राज्य जांच आयोग गठित न होना जन आक्रोश का बड़ा कारण बना हुआ है. इसके अलावा, उग्र-रूढ़िवादी यानी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों को सैन्य सेवा से दी गई छूट को खत्म करने की मांग पर समाज दो हिस्सों में बंटा हुआ है. नेतन्याहू सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को सीमित करने के लिए लाए गए न्यायिक सुधारों के प्रस्ताव ने भी लोकतांत्रिक संतुलन को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है. बढ़ती महंगाई और वित्तीय संकट से जूझ रही जनता के लिए दोगुना हो चुका रक्षा बजट भी चिंता का विषय बना हुआ है.

प्रमुख दावेदार और राजनीतिक समीकरण

नेतन्याहू का गठबंधन वर्तमान में बेहद नाजुक बहुमत पर टिका हुआ था. इस बार उनके सामने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाली नई 'याशर' पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्रियों नफ्ताली बेनेट तथा यायर लापिड के गठबंधन का मजबूत विकल्प मौजूद है. विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने आपस में चुनाव से पहले एक-दूसरे पर हमला न करने और चुनाव बाद एकजुट होकर सरकार बनाने का औपचारिक समझौता किया है. 

वहीं, इजराइल की राजनीति में अरब-नेतृत्व वाली पार्टियां भी अहम भूमिका निभा सकती हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद चुनाव लड़ने की अनुमति मिली है. हालांकि, अधिकांश यहूदी-नेतृत्व वाले विपक्षी समूहों ने उनके साथ औपचारिक गठबंधन से दूरी बनाई हुई है. वर्ष 2019 के बाद से यह इजराइल का छठा राष्ट्रीय चुनाव है, लेकिन 1988 के बाद यह पहली बार है जब कोई संसद अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करके चुनाव में जा रही है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP