मंगल, 20 अक्टू. 2026

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फसल बर्बादी और कर्ज से तंग आकर नांदेड़ में किसान ने की आत्महत्या

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में सूखा और वित्तीय तंगी से जूझ रहे एक 46 वर्षीय किसान ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. खेत में फांसी लगाने से पहले किसान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उसने फसल खराबे का मुआवजा न मिलने, कर्ज माफी से वंचित रहने और बेटी की मेडिकल फीस माफ न होने पर सरकारी तंत्र से तीखे सवाल पूछे.

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20 अक्टू. 2026, 01:04 PM 2 मिनट में पढ़ें 14

File Photo
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नई दिल्ली । डेस्क: महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में सूखे के कारण फसल बर्बाद होने, सिर पर चढ़े कर्ज और बेटी की मेडिकल पढ़ाई के खर्च से परेशान 46 वर्षीय किसान शंकर अबावराव क्षीरसागर ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. इस खौफनाक कदम को उठाने से पहले किसान ने अपने खेत में एक वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसमें उसने जिला प्रशासन और सरकारी व्यवस्था की बेरुखी पर गंभीर सवाल खड़े किए.

लिंबगांव थाना पुलिस के अनुसार, बोरगांव गांव के रहने वाले शंकर क्षीरसागर ने अपने छोटे से खेत में सोयाबीन की फसल बोई थी. लेकिन लंबे समय तक बारिश न होने के कारण सूखा पड़ गया और पूरी फसल नष्ट हो गई. फसल के नुकसान, बकाया कर्ज और बेटी की शिक्षा के भारी खर्च ने उन्हें मानसिक और वित्तीय रूप से तोड़ दिया था. सोमवार दोपहर को वे अपने खेत पर गए, जहां उन्होंने अपने मोबाइल फोन से एक भावुक अपील वाला वीडियो बनाया और उसे अपलोड कर दिया.

सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आते ही परिजनों और स्थानीय पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. शंकर क्षीरसागर का शव खेत में एक पेड़ से लटका हुआ मिला. 
वीडियो में उन्होंने जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए सवाल उठाया था कि फसल पूरी तरह तबाह होने के बावजूद उन्हें अब तक कोई सरकारी राहत क्यों नहीं मिली? उन्होंने यह भी पूछा कि कई योजनाओं के दावों के बाद भी उन्हें ऋण माफी का लाभ क्यों नहीं मिला और सूखा प्रभावित किसानों के बच्चों की फीस माफी के सरकारी आदेश के बावजूद उनकी बेटी की मेडिकल कॉलेज की फीस माफ क्यों नहीं की गई?

गौरतलब है कि महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र इस समय पिछले एक दशक के सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहा है. राज्य के 358 में से 305 उप-मंडलों यानी 85 प्रतिशत से अधिक तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है. 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मराठवाड़ा के आठ जिलों में वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 465 किसान खुदकुशी कर चुके हैं, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 1,131 दर्ज किया गया था. इस त्रासदी और किसान की आत्महत्या ने एक बार फिर ग्रामीण संकट और जमीनी स्तर पर राहत योजनाओं के क्रियान्वयन की पोल खोलकर रख दी है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP